रायगढ़। सरकार की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजनाओं—प्रधानमंत्री जनधन योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)—का मकसद देश के हर नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए न्यूनतम प्रीमियम पर सुरक्षा कवच उपलब्ध कराना है। लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। खासकर बहु-खाता धारकों के बीच एक नई तरह की उलझन सामने आई है, जो सीधे उनकी जेब से जुड़ी हुई है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खुले कई खातों से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का प्रीमियम स्वतः कट रहा है। यानी, यदि किसी व्यक्ति के तीन या चार बैंक खाते सक्रिय हैं, तो हर खाते से सालाना प्रीमियम अलग-अलग कट जाता है। ऐसे में एक व्यक्ति अनजाने में एक ही योजना के लिए कई बार भुगतान कर रहा है।
समस्या कहाँ है?
मूल समस्या जानकारी के अभाव और प्रक्रियागत अस्पष्टता की है। अधिकांश मामलों में जब बैंक खाते खोले जाते हैं, तब संबंधित बीमा योजनाओं के फॉर्म भी साथ में भरवा लिए जाते हैं। खाताधारकों को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि भविष्य में यदि उनके अन्य बैंक खातों में भी यह योजना सक्रिय हो जाती है, तो वहां से भी अलग से प्रीमियम कटेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ एक व्यक्ति को एक ही बीमा कवर के रूप में मान्य होता है। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक खातों के माध्यम से इस योजना में नामांकित है, तो प्रीमियम भले ही कई खातों से कट जाए, लेकिन दावा (क्लेम) की स्थिति में केवल एक ही कवर लागू होता है। इस स्थिति में अतिरिक्त कटे प्रीमियम का कोई प्रत्यक्ष लाभ खाताधारक को नहीं मिलता।
बड़ी तस्वीर क्या कहती है?
भारत में बैंकिंग विस्तार के बाद एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसके पास दो, तीन या उससे अधिक बैंक खाते हैं—कभी सरकारी योजनाओं के लिए, कभी सब्सिडी के लिए तो कभी निजी लेन-देन के लिए। यदि इन सभी खातों में बीमा योजनाएं स्वतः सक्रिय हैं, तो हर साल करोड़ों लोगों से कई गुना प्रीमियम की वसूली हो रही है।
सरल गणना के आधार पर देखें तो यदि एक व्यक्ति से औसतन तीन खातों के माध्यम से प्रीमियम कट रहा है, तो वह निर्धारित राशि का तीन गुना भुगतान कर रहा है। ऐसे में देशभर में यह आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अतिरिक्त रूप से कटे ये पैसे किस रूप में उपयोग हो रहे हैं और क्या इसके लिए कोई पारदर्शी व्यवस्था मौजूद है।
जागरूकता की कमी बनी वजह
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग साक्षरता अब भी सीमित है। अधिकांश खाताधारकों को यह तक जानकारी नहीं होती कि उनके खाते में कौन-कौन सी योजनाएं सक्रिय हैं। कई लोग वर्षों तक प्रीमियम कटने के बाद भी यह नहीं समझ पाते कि यह कटौती किस मद में हो रही है।
क्या चाहते हैं उपभोक्ता?
लोगों की प्रमुख मांग है कि बैंकों द्वारा समय-समय पर खाताधारकों को स्पष्ट सूचना दी जाए कि उनके किस खाते में कौन-सी बीमा योजना सक्रिय है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति के कई खातों में एक ही योजना चालू है, तो उसे सरल प्रक्रिया के तहत बाकी खातों से योजना बंद कराने का विकल्प दिया जाए।
नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत
वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। बैंकिंग संस्थानों और संबंधित विभागों को इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे, ताकि एक ही व्यक्ति से अनावश्यक रूप से बार-बार प्रीमियम कटने की स्थिति को रोका जा सके।
सरकार की मंशा निश्चित रूप से नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने की है, लेकिन यदि जानकारी के अभाव में वही योजना लोगों के लिए भ्रम और असंतोष का कारण बनने लगे, तो यह व्यवस्था पर पुनर्विचार का समय है।

