BhokochandBhokochand
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Search
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
Reading: सुशासन में माफियाराज! नामजद हमलावर खुलेआम, कानून बेबसमैकल में पत्रकार पर हमला — 10 दिन बाद भी न गिरफ्तारी, न जब्ती
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
BhokochandBhokochand
Font ResizerAa
Search
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
Blog

सुशासन में माफियाराज! नामजद हमलावर खुलेआम, कानून बेबसमैकल में पत्रकार पर हमला — 10 दिन बाद भी न गिरफ्तारी, न जब्ती

Basant Ratre
Last updated: January 20, 2026 9:25 am
Basant Ratre 75 Views
Share
4 Min Read
IMG 20260120 WA0007
SHARE

अनूपपुर / अमरकंटक / जीपीएम | विशेष रिपोर्ट“सुशासन” के दावों के बीच मैकल पर्वत क्षेत्र आज माफिया शासन का खुला सबूत बनता जा रहा है। अवैध खनन, ब्लास्टिंग और पत्थर तस्करी के खिलाफ लगातार सच उजागर कर रहे एक पत्रकार पर 8 तारीख को हुए जानलेवा हमले के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह ठप है।सबूत सामने हैं, आरोपी नामजद हैं, वीडियो में मौजूदगी का दावा है, फिर भी 10 दिन बीतने के बाद एक भी गिरफ्तारी नहीं।

नामजद आरोपी खुले, पुलिस खामोशहमले के मामले में जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं, वे न सिर्फ खुलेआम घूम रहे हैं बल्कि पूरे क्षेत्र में माफिया नेटवर्क पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। न तो—हमले में इस्तेमाल वाहन जब्त हुआन खनन में लगे उपकरणों पर कार्रवाईन किसी आरोपी से पूछताछ की ठोस जानकारीयह चुप्पी अब सवाल बन चुकी है

—कानून सो रहा है या साजिश में शामिल है?हमले के बाद भी ब्लास्टिंग!मैकल में माफिया का खुला एलान, सबसे सनसनीखेज तथ्य यह है कि पत्रकार पर हमले और जनआक्रोश के बावजूद 17 तारीख को फिर ब्लास्टिंग की गई। यानी माफिया ने साफ संदेश दे दिया—“न रिपोर्टिंग रुकी, न हमारा कारोबार।”मैकल बायोस्फियर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विस्फोट होना सीधे-सीधे पर्यावरण कानून, वन अधिनियम और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर तमाचा है।

सच दिखाने वाले को फंसाने की साजिश?पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि माफिया पक्ष ने दबाव बनाने के लिए 10 तारीख को अमरकंटक थाने में काउंटर/झूठी एफआईआर दर्ज कराई, ताकि हमला झेलने वाला ही आरोपी बन जाए।

यह वही पुराना फार्मूला है—० सच बोलो → अपराधी बना दो० सवाल पूछो → केस ठोक दोदो राज्यों की सीमा, एक माफिया साम्राज्यमैकल क्षेत्र MP-CG सीमा पर फैला हुआ है। मामला अब सिर्फ एक थाने या एक जिले का नहीं रहा—अवैध खननविस्फोटक ब्लास्टिंगपत्रकारों पर हमलेपुलिस की निष्क्रियताएक संगठित, संरक्षित और राजनीतिक रूप से ताकतवर माफिया नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं।

कई सवाल जवाब निरंक जब आरोपी नामजद हैं तो गिरफ्तारी क्यों नहीं?वीडियो सबूत के बावजूद जांच क्यों ठंडी?बायोस्फियर क्षेत्र में ब्लास्टिंग किसके संरक्षण में?काउंटर एफआईआर दर्ज करने की अनुमति किसने दी?क्या माफिया कानून से ऊपर है?अब मांग — शीर्ष स्तर की कार्रवाईपत्रकार संगठनों और नागरिक समाज की स्पष्ट मांग है—MP और CG दोनों राज्यों के Chief Secretary स्तर पर जांचतत्काल गिरफ्तारी और वाहन/मशीनरी जब्तीमैकल क्षेत्र में अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंधपीड़ित पत्रकार को सुरक्षा और न्यायलोगों में चर्चा का विषय!अगर नामजद हमलावर बेखौफ रहें, पत्रकार लहूलुहान हों, और माफिया खुलेआम पहाड़ उड़ा दे, तो यह सिर्फ कानून की विफलता नहीं, सुशासन के दावे का अंतिम संस्कार है। अब सवाल यही है, सरकार माफिया के साथ है या संविधान के?पत्रकार पर हमले और माफियाराज के खिलाफ निर्णायक संघर्ष के संकेतमैकल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन, ब्लास्टिंग और पत्रकार पर हुए हमले के बाद अब आक्रोश आंदोलन में बदलता दिख रहा है।

प्रशासन की चुप्पी और आरोपियों की बेखौफ मौजूदगी ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।सूत्रों के मुताबिक पत्रकार संगठन, पर्यावरण कार्यकर्ता, आदिवासी समुदाय और स्थानीय नागरिक मिलकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।सीमा पार उबाल — MP–CG दोनों राज्यों में हलचलमैकल मामला अब दो राज्यों की सीमा तक फैल चुका है।खबर है कि—संयुक्त धरनामशाल जुलूसजिला-स्तरीय घेरावऔर जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी चल रही है।आंदोलन का केंद्रीय सवाल साफ है— “माफिया चलेगा या कानून?”प्रशासन के लिए आख़िरी चेतावनीआंदोलनकारियों का कहना है कि यदि—नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारीअवैध खनन-ब्लास्टिंग पर पूर्ण रोकऔर काउण्टर केस करने वाले थानेदार की बर्खास्तगी पत्रकार के खिलाफ FIR खारिज की मांग नहीं दी गई, तो शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

Related

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link
By Basant Ratre
Follow:
Bhokochand.com एक हिंदी न्यूज़ पोर्टल है , इस पोर्टल पर छत्तीसगढ़ सहित देश विदेश की ताज़ा खबरों को प्रकाशित किया जाता है|
Previous Article IMG 20260119 WA0034 छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ की रायगढ़ कलेक्टर से सौजन्य भेंट, कैलेंडर वितरण अभियान को मिली नई ऊर्जा
Next Article IMG 20260120 WA0012 रावत जाति को केन्द्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री व आयोग को सौंपा गया ज्ञापन
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe

Latest News

file 00000000f64c820b8d6196a3d93995cb
सर्पदंश पीड़ित परिवारों को एक सप्ताह में मिली राहत, घरघोड़ा तहसील ने तेजी से कराया RBC प्रकरणों का भुगतान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की संवेदनशील पहल से मृतकों के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता, अधिकारियों की तत्परता की हो रही सराहना
घरघोडा़ रायगढ़ August 11, 2026
IMG 20260811 WA0015
महाजेंको कोल ब्लॉक: 7 गांवों का प्रस्तावित विस्थापन, प्रभावित परिवारों को चाहिए स्पष्ट पुनर्वास नीति
घरघोडा़ तमनार रायगढ़ August 11, 2026
IMG 20260811 065105
 शंखदेव मिश्रा को मिला ‘विश्वास-चेतना सम्मान  लेखन, समाजसेवा और जनजागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलांगीर में हुए सम्मानित
घरघोडा़ रायगढ़ August 11, 2026
भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से ही पत्रकारिता को मिलेगी सही दिशा
राजधानी August 10, 2026

Categories

  • Blog
  • कवर्धा
  • खेल
  • घरघोडा़
  • डभरा
  • तमनार
  • पंडरिया
  • भटगांव
  • राजधानी
  • रायगढ़
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?