रायगढ़। कभी लोगों के सपनों को “सुरक्षित निवेश” का सपना दिखाने वाली सहारा इंडिया की कहानी अब पुलिस की फाइलों और अदालत के गलियारों में सिमटती जा रही है।
करोड़ों रुपये की जमा पूंजी लौटाने के बजाय तीन साल से फरार चल रहे सहारा इंडिया के शाखा प्रबंधक विजय कुमार शराफ को आखिरकार रायगढ़ पुलिस ने “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत धर दबोचा। लगता है कि कानून की चाल भले ही धीमी हो, लेकिन जब चलता है तो सीधे दरवाजे तक पहुंच जाता है।

कबीर चौक स्थित सहारा इंडिया कार्यालय के ब्रांच मैनेजर रहे विजय कुमार शराफ को कोतरारोड़ इलाके से गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि साहब पिछले तीन वर्षों से ऐसे गायब थे, मानो निवेशकों के पैसों के साथ “सहारा” भी कहीं खो गया हो। लेकिन पुलिस की टीम ने मुखबिर की सूचना पर उन्हें ससुराल पहुंचते ही पकड़ लिया और न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
दरअसल, वर्ष 2022 में रायगढ़ निवासी विकास निगानिया ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सहारा इंडिया के अधिकारियों ने कंपनी की विश्वसनीयता और बड़े-बड़े वादों का सहारा लेकर उनसे और उनके परिवार से करीब 40 लाख रुपये निवेश कराए। निवेश की अवधि पूरी होने के बाद जब रकम लौटाने की बारी आई, तो वादे हवा हो गए और निवेशकों को सिर्फ आश्वासन की रसीदें ही हाथ लगीं।
जांच आगे बढ़ी तो कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं निकली। दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि निवेशकों से करोड़ों रुपये लेकर अलग-अलग सहकारी समितियों के नाम पर बॉण्ड जारी किए गए। अब तक रायगढ़ समेत कई जिलों के 3,848 निवेशकों के करीब 40 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आ चुकी है।
पुलिस इससे पहले भी सहारा इंडिया के कई बड़े अधिकारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपियों से कार, मोटरसाइकिल, बैंक खाते और जमीन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। यानी जिन पैसों को लोग अपने भविष्य की सुरक्षा समझ रहे थे, उनसे कुछ लोगों का वर्तमान काफी सुरक्षित और आरामदायक हो गया था।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल उन हजारों निवेशकों का है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत की कमाई “बेहतर भविष्य” के सपने के साथ जमा की थी। अब वे अदालत और प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि कहीं उनका पैसा भी किसी दिन “परिपक्व” होकर वापस लौट आए।
उधर, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने साफ संदेश दिया है कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल, रायगढ़ पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। बाकी आरोपी भी शायद यही सोच रहे होंगे कि “सहारा” तो बहुत बड़ा था, लेकिन अब बचने का सहारा आखिर कहां मिलेगा?

