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पेशी से पहले ही नायब तहसीलदार ने सुना दिया फैसला, राजस्व न्यायालय की गरिमा तार-तार

Basant Ratre
Last updated: January 19, 2026 10:35 am
Basant Ratre
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5 Min Read
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कलेक्टर, एसपी और आईजी से शिकायत – BNS 257 व 318 में कार्रवाई की मांग

छत्तीसगढ़ । सूरजपुर । विशेष रिपोर्टसूरजपुर जिले के लटोरी तहसील कार्यालय से राजस्व न्याय व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है।

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आरोप है कि नायब तहसीलदार न्यायालय में लंबित नामांतरण प्रकरण में निर्धारित अगली पेशी से पहले ही चोरी-छिपे अंतिम आदेश पारित कर दिया गया, जिससे न सिर्फ़ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ, बल्कि पूरे मामले को सोची-समझी साजिश और धोखाधड़ी का रूप दे दिया गया।

इस मामले में पीड़ित पक्ष ने तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा, नायब तहसीलदार शैलेन्द्र दिवाकर और हल्का पटवारी संतोष भनिया व रितेश नागवंशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर सूरजपुर, पुलिस अधीक्षक सूरजपुर और पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज से लिखित शिकायत की है।

सुनवाई चल रही थी, लेकिन फैसला पहले ही लिख दिया गयाशिकायतकर्ता गणेश राम और उमेश कुमार के अनुसार,राजस्व प्रकरण क्रमांक 202512263100005/ब-121/2025-26 नायब तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन था।घटनाक्रम इस प्रकार बताया गया है—7 जनवरी 2026 को अनावेदक पक्ष ने आदेश 7 नियम 11 CPC के तहत आपत्ति प्रस्तुत की।न्यायालय द्वारा आवेदकों को आपत्ति का जवाब देने के लिए 21 जनवरी 2026 की अगली तारीख तय की गई।

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 21 जनवरी से पहले ही, दिनांक 9 जनवरी 2026 को बैक-डेट में अंतिम आदेश पारित कर दिया गया।आवेदकों को इसकी जानकारी तब हुई जब उन्होंने 13 जनवरी 2026 को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त की।

पीड़ितों का आरोप है कि यह आदेश गुप्त तरीके से, बिना सुनवाई का अवसर दिए, नियमों की खुली अवहेलना कर पारित किया गया।

क्षेत्राधिकार का खुला उल्लंघन, नियमों को रौंदने का आरोपशिकायत में तहसील कार्यालय के भीतर क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर गंभीर अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।आरोपों के अनुसार—ग्राम लटोरी से संबंधित भूमि मामलों की सुनवाई का वैधानिक अधिकार तहसीलदार लटोरी सुरेंद्र पैंकरा के पास है।ग्राम द्वारिकानगर के मामलों की सुनवाई का अधिकार नायब तहसीलदार शैलेन्द्र दिवाकर को है।

इसके बावजूद, आरोप है कि लटोरी ग्राम की भूमि के संबंध में कोई वैध आवेदन न होने पर भी नामांतरण संबंधी आदेश/ज्ञापन जारी किया गया।

हल्का पटवारी संतोष भनिया और रितेश नागवंशी पर बिना वैध आदेश, आपसी सांठ-गांठ से राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने का आरोप लगाया गया है।पीड़ितों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित योजना के तहत की गई, ताकि वास्तविक हितग्राहियों को नुकसान पहुँचाया जा सके।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध का आरोपआवेदकों ने इस पूरे मामले को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य बताया है।

उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है—BNS धारा 257न्यायिक कार्यवाही में किसी लोकसेवक द्वारा जानबूझकर कानून के विपरीत, भ्रष्ट तरीके से आदेश पारित करना।BNS धारा 318धोखाधड़ी, छलपूर्वक संपत्ति के हस्तांतरण या अधिकार प्रभावित करने से संबंधित अपराध।

कलेक्टर-एसपी से मांग: फाइल जब्त हो, एफआईआर दर्ज होपीड़ित पक्ष ने 14 जनवरी 2026 को कलेक्टर सूरजपुर, एसपी सूरजपुर और आईजी सरगुजा रेंज को भेजी शिकायत में मांग की है कि—तहसील न्यायालय से मूल केस फाइल तत्काल जब्त की जाए।

आदेश पारित करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।दोषी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैंक्या राजस्व न्यायालय में सुनवाई अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?

क्या पेशी से पहले फैसला लिखना अब “नया नियम” बनता जा रहा है?क्या ऐसे मामलों में सिर्फ़ शिकायतें दर्ज होंगी या जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी?

अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर आरोप को काग़ज़ी शिकायत मानकर टालते हैं या कानून के मुताबिक कार्रवाई करते हैं।

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