रायगढ़, 26 अगस्त 2026। वर्षों से जिस मकान और जमीन को ग्रामीण अपनी मेहनत और जीवन की जमा-पूंजी से अपना मानकर रह रहे थे, अब उस संपत्ति को सरकारी रिकॉर्ड में भी मजबूत पहचान मिल रही है। स्वामित्व योजना रायगढ़ जिले के ग्रामीणों के लिए महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि संपत्ति के अधिकार को कानूनी और प्रमाणिक आधार देने वाली महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है।




मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप अब तक 19,917 ग्रामीणों को उनके मकानों एवं परिसंपत्तियों के स्वामित्व का अधिकार अभिलेख वितरित किया जा चुका है। दस्तावेज हाथ में आते ही ग्रामीणों के चेहरे पर वर्षों से अपनी संपत्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के स्थान पर सुरक्षा और विश्वास दिखाई दे रहा है।
884 गांवों का ड्रोन से सर्वे, संपत्तियों का होगा सटीक रिकॉर्ड
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिले के 884 ग्रामों की आबादी भूमि का ड्रोन सर्वेक्षण कराया जा चुका है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा इनमें से 774 ग्रामों के नक्शे एवं अधिकार अभिलेख जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिए गए हैं। वहीं 384 ग्रामों में अधिकार अभिलेख वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

ड्रोन तकनीक के माध्यम से संपत्तियों की सीमा, क्षेत्रफल और स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण किया जा रहा है। इससे जहां अभिलेख तैयार करने में पारदर्शिता बढ़ रही है, वहीं भविष्य में जमीन और मकान से जुड़े विवादों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
घरघोड़ा में सबसे ज्यादा हितग्राहियों को मिला अधिकार अभिलेख
जिले में तहसीलवार देखें तो घरघोड़ा क्षेत्र के 6,468 ग्रामीणों को अधिकार अभिलेख मिल चुके हैं। इसके अलावा कापू में 2,218, खरसिया में 701, छाल में 1,282, तमनार में 1,570, धरमजयगढ़ में 1,004, पुसौर में 2,702, मुकडेगा में 1,117, रायगढ़ में 1,159 तथा लैलूंगा में 1,696 हितग्राहियों को स्वामित्व संबंधी अभिलेख वितरित किए जा चुके हैं।

यह आंकड़ा बताता है कि योजना का असर जिले के ग्रामीण इलाकों में तेजी से पहुंच रहा है और बड़ी संख्या में परिवारों को अपनी संपत्ति का प्रमाणिक दस्तावेज मिल रहा है।
सिर्फ कागज नहीं, ग्रामीणों के लिए संपत्ति की मजबूत पहचान
स्वामित्व प्रमाण-पत्र मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्रामीणों के पास अब अपनी संपत्ति का व्यवस्थित और प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। आवश्यकता पड़ने पर संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच आसान होने की संभावना है।
वहीं संपत्ति की सीमा और क्षेत्रफल स्पष्ट होने से भविष्य में पारिवारिक अथवा पड़ोसी विवादों में कमी आ सकती है। गांवों की सार्वजनिक भूमि, रास्ते, नाले, तालाब और सरोवर जैसी परिसंपत्तियों का भी स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार होने से इनके संरक्षण और प्रबंधन में ग्राम पंचायतों को मदद मिलेगी।
गांवों के विकास की योजना बनाने में भी मिलेगी मदद
स्वामित्व योजना के तहत तैयार होने वाला संपत्ति रजिस्टर ग्राम पंचायतों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे पंचायतों को अपने क्षेत्र में संपत्ति धारकों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और भविष्य की विकास योजनाएं तैयार करने, सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार करने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय करने में सुविधा होगी।
स्वामित्व योजना ने ग्रामीणों को सिर्फ एक दस्तावेज नहीं दिया है, बल्कि वर्षों से उनके कब्जे और निवास में रही संपत्ति को सरकारी अभिलेखों में एक प्रमाणिक पहचान देने का काम किया है। यही कारण है कि अधिकार अभिलेख हाथ में आते ही ग्रामीणों में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। उनके लिए यह कागज का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से खड़े किए गए आशियाने पर अधिकार की मजबूत मुहर है।
