
रायगढ़ जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हौसले मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सफलता की राह जरूर निकलती है। इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं अनमोल गौतम, जिनका चयन लगातार छह माह तक चली चयन प्रक्रिया एवं साक्षात्कार के बाद एस. व्यास यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट्स के पद पर हुआ है।अनमोल की सफलता की कहानी सामान्य नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग, संस्कार और अदम्य हौसले की कहानी है। जब अनमोल अपनी मां के गर्भ में मात्र तीन माह की थीं, तभी उनके पिता का असामयिक निधन हो गया। वह अपने पिता का चेहरा तक नहीं देख सकीं। जीवन की शुरुआत से ही पिता के स्नेह और संरक्षण से वंचित अनमोल को उनकी मां ने कभी परिस्थितियों के आगे झुकने नहीं दिया।अनमोल की मां श्रीमती निशा गौतम एक सरकारी शिक्षिका हैं। उन्होंने एक ओर शिक्षक के रूप में बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने का दायित्व निभाया, तो दूसरी ओर एक मां के रूप में अपनी बेटी के भविष्य को संवारने के लिए हर कठिन परिस्थिति का सामना किया। पति के निधन के बाद बेटी की जिम्मेदारी अकेले संभालते हुए उन्होंने न केवल अनमोल की पढ़ाई पर ध्यान दिया, बल्कि उसके खेल और करियर को भी निरंतर प्रोत्साहित किया।
माँ निशा गौतम ने भी समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। अनमोल ने ओ.पी. जिंदल स्कूल से शिक्षा प्राप्त की तथा. एल.एन.आई.पी.ई., ग्वालियर से बी.पी.एड. एवं एम.पी.एड. किया। इसके बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जालंधर से पीएच.डी. कर रही है। खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 200 एवं 400 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। विद्यालय में उन्हें लगातार पांच वर्षों तक ‘एथलीट ऑफ द ईयर’ की शील्ड प्राप्त हुई तथा ऑलराउंडर के रूप में भी सम्मानित किया गया।
अनमोल ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय भूमिका निभाई। ऑफिशिएटिंग एवं खेल गतिविधियों के लिए उन्होंने रांची, देहरादून, चंडीगढ़ और जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर सहभागिता की। खेलो इंडिया के आयोजन में बस्तर में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।अनमोल की इस सफलता में उनके नाना श्री के.के.एस. ठाकुर, नानी, मामा एवं मामी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कठिन समय में परिवार के इन सदस्यों ने मां-बेटी का साथ दिया और अनमोल को आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया।अनमोल ने अपनी मां से विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने का हौसला सीखा। शिक्षा और खेल के प्रति समर्पण, निरंतर मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें आज इस गौरवपूर्ण मुकाम तक पहुंचाया है। छह माह तक चली चयन प्रक्रिया और साक्षात्कार के बाद प्रतिष्ठित एस. व्यास यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट्स के पद पर उनका चयन उनके परिश्रम और प्रतिभा का प्रमाण है।यह उपलब्धि केवल अनमोल की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उस माँ के वर्षों के संघर्ष और त्याग की जीत भी है, जिसने पति के असमय निधन के बाद अपनी बेटी को संभाला, उसे शिक्षा दी, संस्कार दिए और उसके सपनों को उड़ान दी।जिस बेटी ने जन्म से पहले ही अपने पिता को खो दिया, उस बेटी ने आज अपनी मेहनत से ऐसा मुकाम हासिल किया है कि उसकी सफलता उसकी माँ के संघर्षों का सबसे खूबसूरत प्रतिफल बन गई है।
अनमोल गौतम की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां भले ही हमारे साथ न हों, लेकिन यदि परिवार का विश्वास, माँ के संस्कार और स्वयं के भीतर जीतने का जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती।अनमोल गौतम की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर परिवारजनों, शुभचिंतकों एवं खेल जगत से जुड़े लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
