रायगढ़/तमनार। एक ओर देश में मानसून सत्र के दौरान पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों पर बहस चल रही है, वहीं रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र से जंगलों की कटाई का मामला सामने आया है। ग्राम नागरामूड़ा में मंगलवार को जिंदल प्रबंधन द्वारा भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा रही है, वहां ग्राम सभा की वैधानिक सहमति नहीं ली गई है। उनका आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति और स्थानीय लोगों की सहमति के जंगलों को उजाड़ा जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के अधिकार भी प्रभावित होंगे।
स्थानीय लोगों ने इसे केवल पेड़ों की कटाई का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। उनका कहना है कि जंगल उनके जीवन, आजीविका और संस्कृति का आधार हैं, ऐसे में किसी भी परियोजना के लिए ग्राम सभा की सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने, पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने और परियोजना से जुड़े सभी वैधानिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम सभा की स्पष्ट सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की कटाई स्वीकार्य नहीं होगी।
क्षेत्र में बढ़ते विरोध के बीच अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि विकास और उद्योग जरूरी हैं, लेकिन इसकी कीमत प्रकृति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को कुचलकर नहीं चुकाई जा सकती।
“प्रकृति की हत्या किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है” — इसी नारे के साथ ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
नोट: ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर जिंदल प्रबंधन और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

