रायगढ़, 1 अगस्त। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ राष्ट्र एवं मानवता की सेवा करना है। हर शिक्षित युवा अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करे, जो समाज के लिए स्थायी रूप से लाभकारी साबित हो। यह प्रेरणादायी संदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में दिया।

ओ.पी. जिंदल स्कूल के सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में राज्यपाल ने 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन करने वाले 84 विद्यार्थियों को 27 स्वर्ण, 28 रजत और 29 कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज का दौर तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो नेतृत्व क्षमता, अनुसंधान, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ देश का भविष्य गढ़ें। उन्होंने कहा कि “डिग्री आपकी पहचान नहीं, बल्कि समाज के लिए आपका योगदान ही आपकी वास्तविक पहचान बनेगा।”

इस अवसर पर जिंदल स्टील के चेयरमैन एवं सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों के युग में युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करनी होगी। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय की चांसलर शालू जिंदल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नए सपनों और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बनाने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार गोयल ने कहा कि वास्तविक सफलता केवल करियर में आगे बढ़ने से नहीं, बल्कि ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने से मिलती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ अकादमिक शोभायात्रा एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कुलपति डॉ. आर.डी. पाटीदार ने विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। अंत में कुलसचिव डॉ. अनुराग विजयवर्गीय ने आभार व्यक्त किया।
दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां बांटने का आयोजन नहीं रहा, बल्कि युवाओं को समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने वाला प्रेरणादायी अवसर बन गया। राज्यपाल का संदेश स्पष्ट था—ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के कल्याण और राष्ट्र निर्माण में उपयोगी साबित हो।

