
कवर्धा/पंडरिया। उप वनमंडल पंडरिया के पूर्व परिक्षेत्र अंतर्गत कक्ष क्रमांक 511, कामठी से सागौन तस्करी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था के साथ-साथ रहमानकापा एवं मैनपुरा वन बैरियर (नाका) पर पदस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बहुमूल्य सागौन लकड़ियों से भरा एक संदिग्ध वाहन रहमानकापा और मैनपुरा वन बैरियर से होकर रेहुन्टा तक पहुंच गया, लेकिन कथित तौर पर उसे किसी स्तर पर नहीं रोका गया। बाद में डायल-112 की टीम ने वाहन को रोककर जांच की और वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लकड़ी से भरे वाहन को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू की।
इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि जब वन तस्करी रोकने के लिए बैरियर, गश्ती दल और नियमित निगरानी की व्यवस्था है, तब तस्करी से जुड़ा वाहन वन बैरियरों से होकर आगे कैसे निकल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि डायल-112 समय पर सक्रियता नहीं दिखाती, तो सागौन की खेप आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकती थी।
घटना के बाद रहमानकापा एवं मैनपुरा वन बैरियर पर पदस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि बैरियरों का उद्देश्य ही वन उपज के अवैध परिवहन पर रोक लगाना है, ऐसे में इस मामले में निगरानी और जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।
वन विभाग ने जब्त वाहन, सागौन की लकड़ियां तथा लकड़ी काटने में प्रयुक्त उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लकड़ी की वास्तविक मात्रा, कीमत और तस्करी में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह भी स्पष्ट किया जाए कि तस्करी का वाहन वन बैरियरों से होकर बिना किसी प्रभावी जांच के आगे कैसे पहुंचा। साथ ही, यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जिम्मेदारी सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
