घरघोड़ा। ग्राम बरौद के विस्थापित परिवारों ने वर्षों से लंबित अपनी मांगों को लेकर अब प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रभावित परिवारों ने वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप बनाए गए निजी मकानों, प्रधानमंत्री आवास, कुओं और बोरवेल का सर्वे एवं मूल्यांकन कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

इसी मांग को लेकर विस्थापित परिवारों ने चरणबद्ध अभियान शुरू किया है। इसके तहत पहले चरण में कलेक्टर जनदर्शन रायगढ़, दूसरे चरण में बरौद उपक्षेत्र के उपक्षेत्रीय प्रबंधक और तीसरे चरण में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा प्रवीण तिवारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया है कि भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रहने के कारण प्रभावित परिवारों का स्वाभाविक विस्तार हुआ। बढ़ती जरूरतों को देखते हुए लोगों ने निजी मकानों का निर्माण कराया।
इसके अलावा कई परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाए तथा अपने निजी संसाधनों से कुएं और बोरवेल भी तैयार किए।
विस्थापितों का कहना है कि इन सभी निर्माण कार्यों का आज तक न तो सर्वे किया गया और न ही मूल्यांकन कराया गया, जिससे कई पात्र परिवार पुनर्वास और मुआवजे के लाभ से वंचित हैं। इस कारण प्रभावित परिवारों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है।
परिवारों ने मांग की है कि प्रशासन और एसईसीएल की संयुक्त टीम गठित कर सभी वास्तविक और आवश्यकता आधारित निर्माणों का शीघ्र सर्वे एवं मूल्यांकन कराया जाए, ताकि उन्हें उनका वैधानिक और न्यायोचित अधिकार मिल सके।
विस्थापित परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे बरौद खुली खदान के मुख्य प्रवेश द्वार पर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

