घरघोड़ा। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर, घरघोड़ा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के लंबित एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर निराकरण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों के समाधान से जहां न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे को गति मिली, वहीं पक्षकारों को भी लंबे कानूनी विवादों से राहत मिली।




व्यवहार न्यायालय घरघोड़ा में आयोजित लोक अदालत के दौरान 27 आपराधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा एनआई एक्ट के 3 प्रकरण, 796 समरी प्रकरण तथा 26,774 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निपटारा किया गया। इन प्रकरणों के निराकरण के माध्यम से कुल 1,95,51,6514 रुपये का सेटलमेंट किया गया।
लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कई मामलों में पक्षकारों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का रास्ता चुना। राजीनामे के आधार पर प्रकरणों के निराकरण के बाद पक्षकारों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ दिखाई दी। लोक अदालत ने यह संदेश भी दिया कि आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से वर्षों से चले आ रहे विवादों का सरल एवं शीघ्र समाधान संभव है।
विधिक साक्षरता शिविर का भी आयोजन
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर श्री दामोदर प्रसाद चंद्रा, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, घरघोड़ा एवं श्रीमती मिनी ठाकुर, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, घरघोड़ा की अध्यक्षता में न्यायालय परिसर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में पैरालीगल वालंटियर बालकृष्ण चौहान, टीकम सिंह सिदार एवं सुभाष चौधरी ने उपस्थित लोगों को विधिक अधिकारों, लोक अदालत की उपयोगिता और विवादों के आपसी समाधान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम में अधिवक्तागण, बैंककर्मी, विभिन्न प्रकरणों के पक्षकार तथा आम नागरिक उपस्थित रहे।
लोक अदालत बनी राहत का माध्यम
घरघोड़ा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया कि न्याय केवल फैसला सुनाने तक सीमित नहीं, बल्कि पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद से बाहर निकालकर राहत दिलाना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को समय, धन और मानसिक तनाव से राहत मिली।
