रायगढ़, 11 सितंबर 2026। जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में होने वाली जनहानि को रोकने अब प्रशासन ने ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने जिला कार्यालय के सभाकक्ष में सड़क सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।




बैठक में पिछले दो वर्षों के सड़क हादसों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। 16 चिन्हित ब्लैक स्पॉट की स्थिति की समीक्षा के साथ ऐसे स्थानों की भी पहचान करने पर जोर दिया गया, जो सरकारी मापदंडों के अनुसार ब्लैक स्पॉट नहीं हैं, लेकिन वहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।
⚠️ जहां खतरा ज्यादा, वहां सुरक्षा इंतजाम तत्काल
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि थाना-वार दुर्घटना संभावित टॉप-10 स्थानों का सर्वे कराया जाए। सड़क के खतरनाक मोड़, कम विजिबिलिटी, सड़क किनारे झाड़ियां, धूल, खराब सोल्डर, स्थानीय सड़कों का हाईवे से जुड़ना और अन्य कारणों को चिन्हित कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
जरूरत के अनुसार स्पीड ब्रेकर, संकेतक, सूचना बोर्ड, स्ट्रीट लाइट और अन्य यातायात सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
📹 अब रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की तैयारी
सड़क सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जिले में रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कलेक्टर ने इसके लिए अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इससे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की निगरानी, यातायात दबाव की पहचान और जरूरत पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप को मजबूत करने की तैयारी है।
🪖 हेलमेट नहीं तो कार्रवाई, शराबी ड्राइविंग पर भी शिकंजा
एसएसपी शशिमोहन सिंह ने दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को इसके गंभीर परिणामों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
थाना प्रभारियों और एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में समन्वय बनाकर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
🚑 हादसा होने के बाद एक-एक मिनट महत्वपूर्ण
बैठक में दुर्घटना के बाद घायल को मिलने वाले गोल्डन ऑवर उपचार पर भी विशेष जोर दिया गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता, डायल-112 के प्रभावी उपयोग और घायलों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
दुर्घटना संभावित मार्गों पर पुलिस पेट्रोलिंग और सड़क की साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने पर चर्चा हुई।
🛣️ हाईवे से जुड़ने वाली गांव की सड़कें भी होंगी निगरानी में
हाईवे से जुड़ने वाली स्थानीय और ग्रामीण सड़कों को भी दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। इन स्थानों पर सड़क की ऊंचाई, मोड़, झाड़ियां, धूल, सोल्डर और विजिबिलिटी का सर्वे कराया जाएगा।
जहां जरूरत होगी, वहां सड़क को समतल करने और वाहन चालकों को पर्याप्त दृश्यता उपलब्ध कराने के उपाय किए जाएंगे।
👷 उद्योगों से बनेंगे ‘यातायात मित्र’
औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क हादसों को कम करने के लिए संबंधित उद्योगों के सहयोग से ‘ट्रैफिक दूत’ अथवा ‘यातायात मित्र’ चयनित कर उन्हें प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भी सामने आया। इनका उपयोग वाहन चालकों और कर्मचारियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने में किया जाएगा।
वहीं कोतरा रोड थाना क्षेत्र के पास बड़ी संख्या में खड़े होने वाले दोपहिया वाहनों को व्यवस्थित करने के लिए उन्हें आरओबी के नीचे निर्धारित स्थान पर रखने का सुझाव भी दिया गया।
बैठक में पिछले दो वर्षों के दुर्घटना संबंधी आंकड़ों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसमें हादसों की संख्या, मृतक एवं घायलों की स्थिति, दुर्घटना वाले प्रमुख स्थानों और हादसों के कारणों पर चर्चा हुई।
अब देखना होगा कि बैठक में बनी यह कार्ययोजना सड़क पर कितनी तेजी से उतरती है, क्योंकि ब्लैक स्पॉट और खतरनाक सड़कों पर महज चेतावनी बोर्ड नहीं, बल्कि समय रहते ठोस सुरक्षा इंतजाम ही जान बचा सकते हैं।
