BhokochandBhokochand
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Search
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
Reading: जमीन अपनी, लेकिन हुकूमत की अनुमति के बिना एक कदम भी नहीं! रजिस्ट्री में पैसा आपका, जमीन आपकी… मगर इस्तेमाल करने से पहले पूछिए—“हुजूर, अब आगे क्या करना है?”
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
BhokochandBhokochand
Font ResizerAa
Search
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
रायगढ़घरघोडा़छत्तीसगढ़तमनारराजधानी

जमीन अपनी, लेकिन हुकूमत की अनुमति के बिना एक कदम भी नहीं! रजिस्ट्री में पैसा आपका, जमीन आपकी… मगर इस्तेमाल करने से पहले पूछिए—“हुजूर, अब आगे क्या करना है?”

Basant Ratre
Last updated: August 12, 2026 12:04 pm
Basant Ratre
Share
8 Min Read
file 00000000795c81f78c7e21fc24f3a816
SHARE

 

रायगढ़। जमीन खरीदना आम आदमी के लिए सिर्फ एक सौदा नहीं, जिंदगी भर की कमाई का सपना होता है। सालों तक बचत कीजिए, पैसे जोड़िए, जमीन पसंद कीजिए, रजिस्ट्री कराइए, स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क दीजिए, फिर नामांतरण कराकर खुशी-खुशी घर लौटिए।

कागज कहता है—“जमीन आपकी है।”

लेकिन जैसे ही मालिक साहब उस जमीन पर एक ईंट रखने की सोचते हैं, व्यवस्था धीरे से कान में कहती है—“जरा ठहरिए… पहले अनुमति तो ले लीजिए!”

और यहीं से शुरू होता है आम आदमी का असली सफर—एक जमीन, कई दफ्तर और न जाने कितनी अनुमति।

रजिस्ट्री के समय सरकार कहती है—मालिक बन गए

जमीन खरीदते समय दस्तावेजों की जांच होती है, रजिस्ट्री होती है, स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क जमा होता है। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होती है।

आम आदमी सोचता है—अब जमीन मेरी है, अब घर बनाऊंगा।

लेकिन व्यवस्था का अगला अध्याय खुलता है—

“पहले डायवर्सन कराइए।”

फिर सवाल आता है—

“नक्शा पास कराया?”

फिर कोई पूछता है—

“भवन अनुज्ञा ली?”

और जरूरत के हिसाब से अगला सवाल—

“NOC लिया?”

यानी जमीन खरीदते समय मालिक बनने की खुशी कुछ देर की है, उसके बाद अनुमति लेने का सिलसिला शुरू।

अपनी जमीन पर घर बनाना है, लेकिन पहले अनुमति की लंबी लाइन

कृषि भूमि पर आवासीय उपयोग करना है तो लागू नियमों के अनुसार डायवर्सन की प्रक्रिया सामने आती है। नगरीय क्षेत्र में भवन निर्माण के लिए स्थानीय निकाय से भवन अनुज्ञा और नक्शा स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं।

नियमों का उद्देश्य गलत नहीं है।

शहर की योजना, सड़क, नाली, पर्यावरण, अग्नि सुरक्षा और सार्वजनिक हित के लिए नियम जरूरी हैं।

लेकिन सवाल नियमों पर नहीं, नियमों की जटिलता पर है।

आम आदमी को परेशानी तब होती है जब उसे पता ही नहीं चलता कि—

कौन-सा आवेदन कहां होगा?

कौन-सा दस्तावेज लगेगा?

पहले कौन-सी अनुमति लेनी है?

बाद में कौन-सी?

कितनी फीस लगेगी?

और फाइल आखिर जाएगी किस टेबल पर?

जमीन खरीदने के बाद “दफ्तर दर्शन” क्यों?

एक मध्यमवर्गीय परिवार जमीन खरीदकर घर बनाना चाहता है। परिवार का मुखिया नौकरी करता है या छोटा व्यवसाय करता है। पत्नी घर संभालती है, बच्चे पढ़ते हैं।

लेकिन जमीन के कागज लेकर कभी राजस्व कार्यालय, कभी नगरीय निकाय, कभी संबंधित विभाग और कभी दूसरे कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।

घर बनाने से पहले ही आदमी इतना “निर्माणाधीन” हो जाता है कि पूछिए मत!

दिहाड़ी मजदूर के लिए एक दिन की छुट्टी का मतलब एक दिन की मजदूरी का नुकसान है। छोटे किसान के लिए बार-बार कार्यालय जाना अतिरिक्त खर्च है। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए दस्तावेज, आवेदन और अलग-अलग प्रक्रियाएं अलग आर्थिक बोझ हैं।

और जब बेचने की बारी आए तो फिर कागजों की बारात!

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने तमाम प्रक्रिया पूरी कर ली। डायवर्सन कराया, नक्शा पास कराया, घर बनाया और वर्षों बाद किसी जरूरत के कारण मकान-जमीन बेचने का फैसला किया।

अब फिर दस्तावेजों की जांच।

राजस्व रिकॉर्ड देखिए।

डायवर्सन आदेश देखिए।

भवन से जुड़े दस्तावेज देखिए।

जहां लागू हो, वहां अन्य आवश्यक अनुमतियां देखिए।

यानी जमीन ने मालिक बदलने का फैसला किया तो कागजों ने भी कहा—

“हम भी चलेंगे बारात में!”

सवाल यह नहीं कि दस्तावेज क्यों चाहिए। सवाल यह है कि एक बार सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापित जानकारी दर्ज होने के बाद उसी जानकारी को बार-बार साबित करने की जरूरत क्यों पड़े?

सरकार व्यवस्था चलाए, नागरिक को दौड़ाए नहीं

यह बात साफ होनी चाहिए कि भूमि संबंधी नियम खत्म करने की मांग नहीं है।

अवैध निर्माण रोकना जरूरी है।

कृषि भूमि का अनियंत्रित उपयोग रोकना जरूरी है।

शहरों की सुनियोजित बसाहट जरूरी है।

सड़क, नाली, पर्यावरण और सुरक्षा के नियम भी जरूरी हैं।

लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें नियम नागरिक की सुरक्षा करें, नागरिक नियमों के बोझ तले दब न जाए।

आज जरूरत है कि रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण, डायवर्सन, भवन अनुमति और बिक्री तक की प्रक्रिया को अधिकतम संभव सीमा तक एकीकृत और ऑनलाइन बनाया जाए।

एक खिड़की हो, दस चक्कर नहीं

सरकार यदि ऐसी व्यवस्था बनाए कि जमीन खरीदते समय ही संबंधित व्यक्ति को डिजिटल रूप से यह जानकारी मिल जाए कि—

इस जमीन का वर्तमान उपयोग क्या है?

आवासीय निर्माण के लिए क्या प्रक्रिया होगी?

कितनी फीस लगेगी?

कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?

कौन-सी अनुमति आवश्यक है?

आवेदन की समयसीमा क्या है?

और किस अधिकारी के स्तर पर मामला लंबित है?

तो आम आदमी की आधी परेशानी वहीं खत्म हो सकती है।

एक आवेदन, एक ट्रैकिंग नंबर और एक तय समयसीमा—यही डिजिटल शासन की असली परीक्षा हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—व्यवस्था किसके लिए?

सरकार नागरिकों से शुल्क लेती है। नागरिक नियमों का पालन करता है। फिर नागरिक की सुविधा भी व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।

अगर एक व्यक्ति के पास पैसा है तो वह वकील, आर्किटेक्ट, दस्तावेज लेखक और अन्य विशेषज्ञों की मदद ले सकता है।

लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय व्यक्ति?

वह खुद फाइल लेकर घूमता है।

कहीं आवेदन, कहीं हस्ताक्षर, कहीं सत्यापन और कहीं “साहब अभी मीटिंग में हैं”…

यही वह जगह है जहां प्रशासनिक सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत दिखाई देती है।

जनता पूछ रही है—“जमीन मेरी है, प्रक्रिया इतनी पराई क्यों?”

आम आदमी कानून से भागना नहीं चाहता।

वह नियम मानना चाहता है।

वह निर्धारित शुल्क देना चाहता है।

वह वैध तरीके से घर बनाना चाहता है।

और जरूरत पड़ने पर वैध तरीके से जमीन बेचना चाहता है।

उसकी मांग सिर्फ इतनी है—

सरकार नियम बनाए, लेकिन नियमों को समझने और पूरा करने के लिए नागरिक को सरकारी गलियारों का विशेषज्ञ बनने के लिए मजबूर न करे।

अब समय है सवाल पूछने का

क्या रजिस्ट्री के साथ ही जमीन के भविष्य की पूरी प्रक्रिया नागरिक को स्पष्ट नहीं की जा सकती?

क्या डायवर्सन, भवन अनुमति और अन्य स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था नहीं हो सकती?

क्या सभी शुल्क और आवेदन एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नहीं आ सकते?

क्या सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी को विभाग आपस में साझा नहीं कर सकते?

क्या तय समय में आवेदन का निपटारा अनिवार्य नहीं होना चाहिए?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या सरकार की व्यवस्था नागरिक के लिए है, या नागरिक व्यवस्था के लिए?

जमीन खरीदने वाला व्यक्ति सिर्फ जमीन नहीं खरीदता, वह अपने परिवार का भविष्य खरीदता है।

इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि ईमानदार नागरिक को नियमों का पालन करने में सुविधा मिले, परेशानी नहीं।

नियम खत्म मत कीजिए…

नियमों का जंगल जरूर छोटा कीजिए।

क्योंकि लोकतंत्र में सरकार का काम सिर्फ यह बताना नहीं कि “क्या नहीं कर सकते”, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि “जो कानूनन कर सकते हैं, उसे आसानी से कैसे कर सकें।”

आम आदमी की आवाज साफ है—

“जमीन मेरी है, कानून आपका हो सकता है… लेकिन प्रक्रिया इतनी कठिन मत बनाइए कि अपनी ही जमीन पर मालिक होने का एहसास कागजों तक सीमित रह जाए।”

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on X (Opens in new window) X

Like this:

Like Loading…

Related

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link
By Basant Ratre
Follow:
Bhokochand.com एक हिंदी न्यूज़ पोर्टल है , इस पोर्टल पर छत्तीसगढ़ सहित देश विदेश की ताज़ा खबरों को प्रकाशित किया जाता है|
Previous Article IMG 20260811 WA0038 घरघोड़ा में 98 किसानों के खातों में पहुंची ₹1.11 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि
Next Article IMG 20260812 WA0019 अरुण कुमार सक्सेना ने संभाला एनएमएल तलईपल्ली के नए परियोजना प्रमुख का कार्यभार
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe

Latest News

1200 675 27615137 thumbnail 16x9 iii
तहसीलदार के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, शासन से मांगा जवाब पुसौर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव का मामला; पहले विभागीय जांच पर भी लग चुकी है अंतरिम रोक
छत्तीसगढ़ रायगढ़ रायपुर September 14, 2026
कवर्धा झलमला थाना क्षेत्र के ग्राम मुड़वाही में टोनही होने के संदेह में अपनी मां के साथ माRपीट कर Hत्या
कवर्धा September 13, 2026
IMG 20260913 WA0020 scaled
सतनाम पंथी महोत्सव में गूंजा सतनाम का संदेश, एक मंच पर जुटे 500 कलाकार
राजधानी छत्तीसगढ़ September 13, 2026
IMG 20260913 WA0016
नवापारा टेंडा में बी.एस. फाउंडेशन का जनसेवा अभियान, 300 ग्रामीणों ने कराया निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण Fortis Hospital के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने की जांच, जरूरतमंदों को दवाइयां और 60 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को निःशुल्क चश्मे की सुविधा
घरघोडा़ रायगढ़ September 13, 2026

Categories

  • Blog
  • कवर्धा
  • खेल
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • जांजगीर-चांपा
  • डभरा
  • तमनार
  • पंडरिया
  • पामगढ़
  • भटगांव
  • राजधानी
  • रायगढ़
  • रायपुर
  • लैलूंगा
  • शक्ति
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?
%d