ओवरलोड गाड़ियां, धूल का गुबार, सड़क पर लंबी कतारें और घंटों जाम—घरघोड़ा की जनता अब कोयला परिवहन की अव्यवस्था से तंग आ चुकी है।
रायगढ़/घरघोड़ा — गारे पेलमा से घरघोड़ा रेलवे साइडिंग तक संचालित कोयला परिवहन अब आम लोगों के लिए राहत नहीं, रोज की मुसीबत बनता जा रहा है। भारी वाहन, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, सड़क पर अव्यवस्थित लाइनें, धूल प्रदूषण और घंटों जाम ने क्षेत्रवासियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

इन्हीं समस्याओं को लेकर सोमवार को दर्जनों क्षेत्रवासियों के साथ युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष उस्मान बेग एसडीएम कार्यालय घरघोड़ा पहुंचे और विस्तृत जनहित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पिछले एक से डेढ़ महीने के भीतर अधिकृत ट्रांसपोर्टर की मनमानी और प्रबंधन की कमजोर निगरानी के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि भारी कोयला लदी गाड़ियां घरघोड़ा के दोनों बायपास चौक, कांटा घर क्षेत्र, रेलवे स्टेशन मार्ग और आबादी वाले इलाकों से तेज रफ्तार में गुजरती हैं। कई गाड़ियां ओवरलोड रहती हैं, कई बिना तिरपाल के चलती हैं और बड़ी संख्या में सड़क पर अव्यवस्थित ढंग से खड़ी कर दी जाती हैं। इससे धूल इतनी बढ़ गई है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है।

लोगों ने सवाल उठाया कि जिस परियोजना की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 23.6 मिलियन टन बताई जा रही है और जहां से करोड़ों का राजस्व निकलता है, वहां आज तक एक ढंग की पार्किंग, अलग प्रतीक्षा क्षेत्र, हाईमास्ट लाइट, पानी छिड़काव, स्पीड कंट्रोल, ब्रेकर और सड़क सुरक्षा संकेतक तक नहीं लगाए जा सके। उत्पादन बढ़ता गया, ट्रिप बढ़ती गई, लेकिन जनता की सुविधा और सुरक्षा हमेशा की तरह पीछे छूटती रही।

सबसे ज्यादा नाराजगी कांटा घर क्षेत्र को लेकर देखने मिली। आरोप है कि जल्दी ट्रिप लगाने की होड़ में वाहन चालक मुख्य सड़क पर दो-दो और तीन-तीन लाइन में गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इससे घंटों लंबा जाम लग जाता है। स्कूली बच्चे, मरीज, एम्बुलेंस, बाजार आने-जाने वाले लोग और आम राहगीर रोज इस अव्यवस्था की मार झेलते हैं।
क्षेत्रवासियों ने यह भी कहा कि जब साइडिंग के भीतर कोयला डंप भर जाता है या लोडिंग में देरी होती है, तब अतिरिक्त गाड़ियों को बाहर सड़क और बायपास पर खड़ा करवा दिया जाता है। इससे कई किलोमीटर तक ट्रकों की लाइन लग जाती है। लोगों ने मांग की है कि इन गाड़ियों के लिए साइडिंग परिसर के भीतर अलग प्रतीक्षा क्षेत्र बनाया जाए, ताकि मुख्य सड़क आम जनता के लिए खुली रहे।

रेलवे स्टेशन मार्ग के सामने लगे बैरियर को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाहर खड़ी लंबी लाइन और बैरियर मिलकर जाम की समस्या को और बढ़ा देते हैं। इसकी वैधता और संचालन व्यवस्था की जांच की मांग भी की गई है।
रात के समय बाहरी लोगों की मौजूदगी और दबावपूर्ण व्यवहार को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। शिकायत है कि देर रात तक बड़ी संख्या में बाहरी लोग, पर्यवेक्षी कर्मचारी और अन्य अनधिकृत तत्व वहां मौजूद रहते हैं, जिनका स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्ट सत्यापन नहीं है। इससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जिन विभागों को पूरी व्यवस्था पर निगरानी रखनी चाहिए, वे सब कुछ देखकर भी चुप बैठे हैं। इससे अधिकृत ट्रांसपोर्टर और प्रबंधन की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।
एसडीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए ओवरलोडिंग, सड़क जाम, धूल प्रदूषण, कांटा घर क्षेत्र की अव्यवस्था, लंबी कतार, बैरियर, सड़क क्षति और रात्रिकालीन गतिविधियों की जांच कराने का भरोसा दिया है।
इस दौरान उस्मान बेग ने साफ कहा कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्रवासियों के साथ अडानी प्रबंधन का लोकतांत्रिक घेराव किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलन कर घरघोड़ा साइडिंग का काम बंद कराने तक की लड़ाई लड़ी जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, क्योंकि घरघोड़ा की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, राहत चाहती है।
