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रायपुर : धान से आगे बढ़ा धमतरी: फसलचक्र परिवर्तन से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि की नई कहानी

Basant Ratre
Last updated: January 22, 2026 5:31 pm
Basant Ratre 65 Views
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5 Min Read
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रायपुर, 22 जनवरी 2026

धान की परंपरागत खेती के लिए पहचाने जाने वाला रत्नागर्भा जिला धमतरी अब कृषि नवाचार, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में एक नई पहचान स्थापित कर रहा है। वर्षों से धान-प्रधान खेती पर निर्भर इस जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर फसलचक्र परिवर्तन को व्यवहार में उतारा गया है।

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इसके तहत कम जल मांग वाली, अधिक लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल फसलों को बढ़ावा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप तिलहन और दलहन फसलों का रकबा तेजी से बढ़ा है तथा मूंगफली और सूरजमुखी जैसी नई फसलों की सफल शुरुआत हुई है।

जिला प्रशासन के नेतृत्व में फसलचक्र परिवर्तन को एक अभियान का स्वरूप दिया गया। गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण और किसानों से सीधे संवाद कर धान के विकल्प के रूप में दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलों के लाभ समझाए गए। स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण के बिना कृषि का भविष्य सुरक्षित नहीं है।

कृषि विभाग द्वारा उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती पद्धतियां, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ी जानकारियां किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाई गईं।

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद जिले में लगभग 30 हजार नलकूपों के माध्यम से भू-जल का अत्यधिक दोहन हो रहा था, जिससे जल संकट की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। जिले के एक लाख अट्ठावन हजार से अधिक कृषकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कम जल मांग वाली रबी फसलों की ओर प्रेरित किया गया।

इस पहल में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, जनप्रतिनिधियों और आमजन की सहभागिता से जल संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता बनी।

फसलचक्र परिवर्तन एवं जल संरक्षण अभियान को दो चरणों में संचालित किया गया। अगस्त से अक्टूबर के दौरान पहले चरण में जिले के 85 ऐसे ग्रामों का चयन किया गया, जहां जल संकट अधिक था और फसल परिवर्तन की संभावना प्रबल थी। इसके बाद नवंबर और दिसंबर में दूसरे चरण के अंतर्गत अभियान का विस्तार करते हुए 201 ग्रामों में कार्यक्रम संचालित किए गए।

इस तरह कुल 227 ग्रामों के लगभग 40 हजार कृषक इस अभियान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े। शिविरों के माध्यम से रबी फसलों के बीजों का वितरण, बीज उत्पादन कार्यक्रमों का पंजीयन तथा रबी ऋण वितरण सुनिश्चित किया गया।

रबी सीजन में 4300 क्विंटल बीज का वितरण किया गया और 5379 कृषकों को 20 करोड़ 54 लाख 31 हजार रुपये का कृषि ऋण प्रदान किया गया। फसल क्षेत्र में आए बदलाव इस अभियान की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। सरसों का रकबा गत वर्ष 2670 हेक्टेयर से बढ़कर 5726 हेक्टेयर हो गया। जिले में पहली बार मगरलोड विकासखंड के बुड़ेनी और चंद्रसुर क्लस्टर में 283 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की गई, वहीं गट्टासिल्ली क्लस्टर में 100 हेक्टेयर में सूरजमुखी की खेती प्रारंभ हुई।

रबी दलहन फसलों का कुल रकबा 21850 हेक्टेयर से बढ़कर 31500 हेक्टेयर हो गया है। चना की खेती 15830 हेक्टेयर से बढ़कर 18179 हेक्टेयर तक पहुंची, मक्का का रकबा 430 हेक्टेयर से बढ़कर 1000 हेक्टेयर से अधिक हो गया है तथा लघु धान्य फसल रागी का उत्पादन इस वर्ष 500 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है।

फसलचक्र परिवर्तन का सकारात्मक असर किसानों की आय के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पड़ा है। दलहनी फसलों से मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटी है और उत्पादन लागत में कमी आई है। तिलहन फसलों से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है। कम पानी वाली फसलों के कारण सिंचाई पर दबाव कम हुआ है, जिससे भू-जल संरक्षण को बल मिला है और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ठोस कदम बढ़े हैं।

किसानों का भरोसा बढ़ाने के लिए शासन द्वारा पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना की खरीदी की गई है। चालू वर्ष में भी समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, जिससे किसानों में फसलचक्र परिवर्तन को लेकर उत्साह और विश्वास दोनों बढ़े हैं। धमतरी जिले में फसलचक्र परिवर्तन एक सफल और अनुकरणीय शासकीय मॉडल के रूप में सामने आया है।

जिला प्रशासन के सतत मार्गदर्शन, प्रशासनिक संकल्प और किसानों की सक्रिय सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और जनभागीदारी से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि एक साथ संभव है। यह पहल न केवल धमतरी जिले के लिए, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बनती जा रही है।

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