रायगढ़, 31 अगस्त 2026।
शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में विभागीय तालमेल की कमी अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने समय-सीमा की बैठक में विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन करें और किसी भी योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों से दूर न रहे।





बैठक में एग्रीस्टैक के लंबित ‘अनक्लेम्ड बकेट’ प्रकरणों की धीमी प्रगति को लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को मैदानी स्तर पर उतरकर किसानों से संपर्क करने और लंबित मामलों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए।
15 सितंबर तक शत-प्रतिशत निराकरण का लक्ष्य
कलेक्टर ने तहसीलवार और समितिवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए साफ कहा कि 15 सितंबर तक एग्रीस्टैक के सभी लंबित ‘अनक्लेम्ड बकेट’ प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण किया जाए।

जिन क्षेत्रों में लंबित मामलों की संख्या अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाकर प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उप संचालक कृषि को एसएडीओ और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने तथा प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने कहा गया।
कलेक्टर ने अधिकारियों को सिर्फ कार्यालय में बैठकर समीक्षा करने के बजाय खुद गांव और खेतों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों से सीधे संपर्क कर वास्तविक स्थिति समझी जाए और अनावश्यक रूप से लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए।

किसान कराएं फॉर्मर रजिस्ट्री
एग्रीस्टैक से जुड़े मामलों को आसान बनाने के लिए कलेक्टर ने जिले के किसानों से अपनी फॉर्मर रजिस्ट्री कराने की अपील की है। किसान बीएलई, सीएससी सेंटर, समिति प्रबंधक कार्यालय या अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
गिरदावरी में कागज नहीं, खेत की वास्तविक स्थिति होगी आधार
डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गिरदावरी में सिर्फ रिकॉर्ड के आधार पर खानापूर्ति न हो, बल्कि खेत में जाकर वास्तविक फसल स्थिति का सत्यापन किया जाए।
सर्वेयरों को मोबाइल एप के माध्यम से मौके पर वास्तविक फसल की जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए। तालाब, मेड़, पड़ती, खलिहान और फसल के रकबे का सही चिन्हांकन करने पर विशेष जोर दिया गया।
जीपीएस के माध्यम से सर्वे में परेशानी आने वाले क्षेत्रों में नियमानुसार मैन्युअल प्रक्रिया अपनाने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने सर्वेयरों की नियमित समीक्षा और आकस्मिक निरीक्षण के जरिए गिरदावरी की जमीनी हकीकत जांचने को कहा।
स्वामित्व योजना में पट्टा वितरण में भी तेजी
स्वामित्व योजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अंतिम प्रकाशन वाले ग्रामों और पट्टा वितरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में समयबद्ध तरीके से पट्टों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ग्राम पंचायत स्तर पर लंबित नामांतरण और बंटवारा प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि समय-सीमा पार कर कोई भी प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए।
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं
कलेक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्वीकृत, निर्माणाधीन और पूर्ण सामुदायिक शौचालयों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने के साथ निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाए।
शिकायतों में दोषी मिले तो होगी कार्रवाई
बैठक में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों और लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को शिकायतों की गंभीरता से जांच करने और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कुल मिलाकर समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर का फोकस साफ रहा—योजनाएं सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। खासकर एग्रीस्टैक के लंबित मामलों को लेकर 15 सितंबर की समय-सीमा ने संबंधित विभागों के सामने अब स्पष्ट लक्ष्य तय कर दिया है।
