घरघोड़ा। एसईसीएल बरौद परियोजना में निजी भूमि के अर्जन एवं खनन उपयोग को लेकर एक नया मामला सामने आया है। ग्राम बरौद, तहसील घरघोड़ा निवासी तीर्थराज दानी, पिता स्व. चिरजीव दानी ने अपनी निजी भूमि के संबंध में जिला कलेक्टर रायगढ़ को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की अभिलेखीय एवं मौका जांच कराने की मांग की है।
आवेदक के अनुसार ग्राम बरौद स्थित खसरा क्रमांक 740/1, रकबा 0.240 हेक्टेयर भूमि उनके स्वामित्व से संबंधित रही है। उनका दावा है कि उक्त भूमि का एसईसीएल बरौद उपक्षेत्र की खनन एवं उत्पादन गतिविधियों में उपयोग किया गया। इसी आधार पर उन्होंने भूमि के वास्तविक अर्जन, परियोजना में उपयोग की अवधि तथा मुआवजा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
एसईसीएल के जवाब पर भी पुनः जांच की मांग
आवेदन में बताया गया है कि भूमि के मुआवजे एवं अन्य वैधानिक लाभ को लेकर एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष पूर्व में भी आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदक के मुताबिक प्रबंधन की ओर से दिए गए जवाब में भूमि का अर्जन कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण से पूर्व किए जाने का उल्लेख किया गया तथा वर्तमान में मुआवजा एवं अन्य लाभ की प्रक्रिया लागू नहीं होने की बात कही गई।
हालांकि, आवेदक ने इस जवाब की राजस्व एवं परियोजना संबंधी मूल अभिलेखों के आधार पर पुनः जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भूमि के अर्जन और उसके बाद परियोजना में वास्तविक उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो पूरे मामले की स्थिति दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट की जानी चाहिए।
2008 से 2015 के बीच खनन गतिविधि का दावा
तीर्थराज दानी ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि उनके अनुसार वर्ष 2008 से 2015 के मध्य खसरा क्रमांक 740/1 की भूमि पर एसईसीएल बरौद उपक्षेत्र द्वारा खनन एवं उत्पादन संबंधी गतिविधियां की गई थीं।
इसी दावे के आधार पर उन्होंने प्रशासन से यह सत्यापित कराने की मांग की है कि उक्त भूमि का वास्तविक रूप से कब और किस प्रक्रिया के तहत अर्जन किया गया, भूमि का परियोजना में कब से उपयोग हुआ तथा उसके एवज में किसी व्यक्ति को मुआवजा अथवा अन्य वैधानिक लाभ प्रदान किया गया या नहीं।
प्रोजेक्ट प्लान से लेकर राजस्व रिकॉर्ड तक जांच की मांग
आवेदक ने कलेक्टर से खसरा 740/1 की मौका जांच कराने के साथ एसईसीएल के प्रोजेक्ट प्लान, खनन योजना, भूमि अर्जन संबंधी दस्तावेज, राजस्व अभिलेख एवं अन्य संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने मांग की है कि भूमि के अर्जन एवं खनन उपयोग की वास्तविक अवधि का सत्यापन किया जाए। यदि जांच में परियोजना द्वारा भूमि के उपयोग की पुष्टि होती है और नियमानुसार कोई मुआवजा या अन्य वैधानिक लाभ देय पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
अब रिकॉर्ड बताएगा वास्तविक स्थिति
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि खसरा 740/1 का वास्तविक अर्जन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, भूमि का परियोजना में उपयोग कब से हुआ और उसके एवज में मुआवजे से संबंधित क्या कार्रवाई की गई। इन सवालों का जवाब संबंधित राजस्व एवं परियोजना अभिलेखों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीर्थराज दानी ने एसईसीएल प्रबंधन द्वारा पूर्व में दिए गए जवाब की भी मूल दस्तावेजों के आधार पर पुनः समीक्षा कर उचित एवं कारणयुक्त निर्णय लिए जाने की मांग की है। आवेदन की प्रतिलिपि एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र के महाप्रबंधक को भी प्रेषित की गई है।
आवेदक ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की है।
