घरघोड़ा/रायगढ़। रायगढ़ जिले में पुलिस द्वारा अपराध और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में घरघोड़ा क्षेत्र के ग्राम चारमार में ग्रामीणों और महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर सामूहिक पहल करते हुए मोर्चा खोल दिया है।
ग्रामीणों ने गांव में शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर घरघोड़ा थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा और पुलिस प्रशासन से सहयोग की अपील की। इस पहल में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।





जन-जागरूकता से ग्रामीणों में बढ़ी जागरूकता
रायगढ़ जिले के एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण के साथ-साथ आम लोगों को कानून, नशे और अवैध गतिविधियों के प्रति जागरूक करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। पुलिस की इसी सोच का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिल रहा है।
चारमार के ग्रामीणों का शराबबंदी को लेकर आगे आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अब ग्रामीण स्वयं अपने गांव को नशे और अवैध शराब से मुक्त कराने के लिए जागरूक होकर आगे आने लगे हैं।
महिलाओं ने संभाली कमान
शराब का सबसे ज्यादा सामाजिक प्रभाव परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में चारमार की महिलाओं ने शराबबंदी की मुहिम में आगे आकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब के कारण परिवार और समाज दोनों प्रभावित होते हैं, इसलिए गांव में शराब के खिलाफ सामूहिक माहौल तैयार करना जरूरी है।
ग्रामीणों द्वारा लोगों को समझाइश देने और शराब से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने की पहल भी की जा रही है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह की कार्यशैली की हो रही सराहना
रायगढ़ जिले में एसएसपी के रूप में शशि मोहन सिंह की कार्यशैली को लेकर पुलिस महकमे में अपराध नियंत्रण और जनसरोकार से जुड़े अभियानों पर विशेष जोर देखने को मिल रहा है। पुलिस की सक्रियता के साथ आम जनता को पुलिस से जोड़ने और उन्हें जागरूक करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और निगरानी के चलते अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर पुलिस का दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि अब ग्रामीण भी पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाकर अपने क्षेत्रों को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पहल करते दिखाई दे रहे हैं।
चारमार के ग्रामीणों की शराबबंदी की पहल को इसी जनभागीदारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
अब प्रशासन से सहयोग की उम्मीद
ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि गांव में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही शराबबंदी की मुहिम को सफल बनाने में ग्रामीणों को प्रशासन और पुलिस का सहयोग मिले।
चारमार से उठी यह आवाज अगर लगातार मजबूत होती है, तो यह केवल एक गांव तक सीमित पहल न रहकर पूरे क्षेत्र में नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता का उदाहरण बन सकती है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह की जन-जागरूकता की सोच और ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी का यह मेल निश्चित रूप से पुलिस और जनता के बीच मजबूत होते भरोसे की तस्वीर पेश करता है
