घरघोड़ा। गेरवानी फीडर से जुड़े पुंजीपथरा, तुमीडीह और समारुमा गांवों में अघोषित बिजली कटौती ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट सूचना या वजह के रात-रातभर बिजली गुल रहती है। उमस भरी गर्मी में जहां लोग बेहाल हैं, वहीं घने अंधेरे ने सुरक्षा की चिंता भी बढ़ा दी है।




ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती अब महज असुविधा का मामला नहीं रह गया है। रात में घरों और गलियों में अंधेरा छा जाने के कारण सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रात के समय बाहर निकलने में डर लगता है।
सांसद के घर के करीब फिर भी समस्या जस की तस
इस पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभावित गांवों से करीब दो किलोमीटर के दायरे में सांसद राधेश्याम राठिया का निवास स्थान भी है।
इसके बावजूद ग्रामीणों को रातभर अंधेरे में रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि के निवास के आसपास का क्षेत्र भी ऐसी समस्या से जूझ रहा है, तो दूरदराज के गांवों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बिजली विभाग की ओर से कटौती का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया जाता। न समय की जानकारी मिलती है और न ही यह पता चलता है कि बिजली कब वापस आएगी।
‘बिजली विभाग की घड़ी में रात छोटी, ग्रामीणों की रात लंबी’
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग के जिम्मेदारों के लिए शायद बिजली कटना सामान्य बात हो, लेकिन जिस परिवार के घर में छोटे बच्चे हों, बुजुर्ग हों या बीमार व्यक्ति हो, उसके लिए बिना सूचना रातभर बिजली गुल होना बड़ी परेशानी है।
व्यंग्यात्मक अंदाज में ग्रामीण कहते हैं कि गेरवानी फीडर में बिजली कब आएगी, यह पूछना अब मौसम का पूर्वानुमान पूछने जैसा हो गया है—कब आएगी, कोई भरोसा नहीं!
अंधेरे में ‘रेंगती मौत’ का डर
बिजली गुल होने के बाद गांवों में अंधेरा इतना बढ़ जाता है कि लोगों को घर से बाहर निकलने में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप-बिच्छुओं का खतरा पहले से अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय बिजली गुल रहना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बिजली कटौती आवश्यक है तो विभाग इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं देता? और यदि कोई तकनीकी समस्या है तो उसका स्थायी समाधान कब होगा?
ग्रामीणों का आक्रोश, जिम्मेदारों से जवाब की मांग
पुंजीपथरा, तुमीडीह और समारुमा के ग्रामीणों ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और अघोषित कटौती पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए मजबूर होंगे।
अब सवाल सीधा है—क्या गेरवानी फीडर के जिम्मेदार ग्रामीणों की इस परेशानी को गंभीरता से लेंगे, या फिर गांवों की रातें अंधेरे में और विभागीय दफ्तरों की फाइलें रोशनी में चलती रहेंगी?
