रायगढ़। मोबाइल आज सिर्फ बातचीत का साधन नहीं, बल्कि किसी की यादों, जरूरी दस्तावेजों, बैंकिंग, संपर्कों और पूरी डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में जब मोबाइल गुम होता है तो उसके साथ सिर्फ हजारों रुपये की कीमत नहीं, बल्कि उसमें संजोई जिंदगी भी खो जाने का डर रहता है। लेकिन रायगढ़ पुलिस की तकनीक आधारित कार्रवाई ने ऐसे ही 150 परिवारों को उनकी खोई हुई डिजिटल दुनिया वापस लौटा दी।




रायगढ़ साइबर पुलिस ने पिछले तीन महीनों में 150 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत 37 लाख 50 हजार रुपये से अधिक है। खास बात यह रही कि इन मोबाइलों को केवल रायगढ़ ही नहीं, बल्कि ओडिशा, बिहार, कोलकाता और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से ट्रेस कर वापस लाया गया।

पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी, नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक एवं साइबर टीम की मौजूदगी में मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए।

जब हाथ में आया अपना मोबाइल, तो आंखों में दिखी खुशी
कई ऐसे लोग भी कार्यक्रम में पहुंचे थे, जिन्होंने लंबे समय से अपने मोबाइल के वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। किसी फोन में जरूरी दस्तावेज थे तो किसी में वर्षों पुरानी तस्वीरें और यादें। किसी के लिए वह फोन महंगा था, तो किसी के लिए उसमें सुरक्षित डेटा उससे कहीं ज्यादा कीमती।
जब पुलिस ने वही खोया हुआ मोबाइल उनके हाथों में वापस रखा, तो चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कई लोगों ने पुलिस अधिकारियों का आभार जताया और टीम के साथ सेल्फी लेकर इस खुशी को यादगार बनाया।
यह सिर्फ मोबाइल की बरामदगी नहीं थी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे की एक तस्वीर थी।
CEIR बना गुम मोबाइल की तलाश का मजबूत हथियार
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के CEIR पोर्टल की मदद से गुम और चोरी हुए मोबाइलों को ट्रेस करने में रायगढ़ साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली।
मोबाइल गुम होने के बाद उसके IMEI नंबर की जानकारी CEIR पर दर्ज होने से मोबाइल को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद यदि कोई व्यक्ति उसमें दूसरी सिम डालकर उसका इस्तेमाल करता है, तो तकनीकी माध्यमों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर साइबर पुलिस उसकी गतिविधियों को ट्रैक करती है।
तकनीकी जानकारी का विश्लेषण कर पुलिस मोबाइल के उपयोगकर्ता और उसके स्थान तक पहुंचती है। इसी तकनीक के सहारे रायगढ़ पुलिस ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में इस्तेमाल हो रहे 150 मोबाइलों को खोज निकाला।
रायगढ़ से बिहार और ओडिशा तक पहुंची पुलिस की तकनीकी निगाह
बरामद मोबाइलों में Vivo, Oppo, Redmi, Poco, Realme, OnePlus, Samsung और Motorola समेत कई कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं।
मोबाइल रायगढ़ के विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावा बिहार, कोलकाता, कोरबा, जांजगीर सहित धरमजयगढ़, घरघोड़ा, पूंजीपथरा, तमनार, छाल और खरसिया क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे थे। साइबर पुलिस ने संबंधित लोगों से संपर्क कर मोबाइल वापस प्राप्त किए और आवश्यक सत्यापन के बाद उन्हें वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया।
एसएसपी बोले—मोबाइल में सिर्फ नंबर नहीं, किसी की पूरी दुनिया होती है
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि आज मोबाइल में बैंकिंग जानकारी, महत्वपूर्ण दस्तावेज, निजी तस्वीरें, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और लोगों की कई महत्वपूर्ण यादें सुरक्षित रहती हैं। इसलिए मोबाइल का गुम होना केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को रास्ते में कोई मोबाइल मिले तो उसे अपने पास रखकर इस्तेमाल न करें, बल्कि तत्काल नजदीकी थाना या साइबर थाना में जमा करें। तकनीकी माध्यमों से मोबाइल उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाया जा सकता है। वहीं, किसी दूसरे व्यक्ति के गुम या चोरी हुए मोबाइल का अनधिकृत इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
तीन महीने की मेहनत, 150 परिवारों की खुशी
साइबर डीएसपी शिखर मरावी के पर्यवेक्षण और साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में टीम ने लगातार शिकायतों की मॉनिटरिंग की। तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करते हुए अलग-अलग स्थानों पर मोबाइलों को ट्रेस किया गया और उन्हें वापस रायगढ़ लाया गया।
इस अभियान में उपनिरीक्षक संजय नाग, सहायक उपनिरीक्षक नंदकुमार सारथी, ज्योत्सना शर्मा, महिला प्रधान आरक्षक रेनू सिंह मांडवी, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, रूपराम पटेल, करुणेश राय, बृजलाल गुर्जर, महिला आरक्षक मेनका चौहान सहित साइबर टीम के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मोबाइल गुम हो तो लापरवाही नहीं, तुरंत कार्रवाई करें
रायगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल गुम या चोरी होने पर तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर IMEI नंबर की जानकारी देकर मोबाइल को ब्लॉक एवं ट्रेसिंग के लिए रिपोर्ट करें।
यदि मोबाइल में बैंकिंग, UPI, ई-मेल या सोशल मीडिया अकाउंट जुड़े हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए तत्काल पासवर्ड बदलना और जरूरी सुरक्षा कदम उठाना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
150 मोबाइल की यह बरामदगी महज आंकड़ा नहीं है।
यह उन 150 परिवारों की खुशी है, जिन्हें लगा था कि उनका मोबाइल अब कभी वापस नहीं आएगा। रायगढ़ साइबर पुलिस ने तकनीक के जरिए न सिर्फ खोई संपत्ति लौटाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि उम्मीद छोड़ देने के बाद भी पुलिस आपकी चीज तलाश सकती है।
रायगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई बताती है—तकनीक जब जिम्मेदार पुलिसिंग के हाथों में हो, तो खोई हुई चीजें भी घर लौट सकती हैं और चेहरे पर मुस्कान भी।
