सर्पदंश मुआवजा दिलाने के नाम पर ₹50 हजार का ‘गारंटी चेक’, कलेक्ट्रेट का बाबू एसीबी के हत्थे चढ़ा
रायगढ़, 28 जुलाई।
सरकार कहती है कि सर्पदंश पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत मिले, लेकिन रायगढ़ कलेक्ट्रेट में शायद राहत का रास्ता पहले “रिश्वत काउंटर” से होकर गुजरता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार रिश्वत नकद में नहीं, बल्कि “गारंटी वाले हस्ताक्षरित चेक” में मांगी गई। मगर बाबू की यह नई तकनीक एसीबी के जाल में उलझ गई।
राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ बाबू राजकुमार सिदार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर की टीम ने ₹50 हजार का हस्ताक्षरित चेक लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि सर्पदंश से मृत महिला के परिजन को मिलने वाली सरकारी मुआवजा राशि दिलाने के एवज में उसने रिश्वत मांगी और फिर नकद के बजाय “गारंटी” के नाम पर चेक मांग लिया।
विडंबना देखिए… जिस परिवार पर पहले सांप का कहर टूटा, वही परिवार सरकारी दफ्तर की फाइलों में भी फंसा रहा। लगता है यहां फाइलों को भी तभी “विषमुक्त” किया जाता है, जब उन पर रिश्वत का एंटी-वेनम चढ़ जाए।
रिश्वत का नया स्टार्टअप मॉडल!
बताया जाता है कि ग्राम बुलाकी, तहसील पुसौर निवासी विजय सिदार की पत्नी रामकुमारी सिदार की वर्ष 2023 में सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। शासन से मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए आवेदन महीनों तक फाइलों में घूमता रहा। आरोप है कि बाबू ने फाइल आगे बढ़ाने की कीमत ₹50 हजार तय कर दी।
जब शिकायतकर्ता ने असमर्थता जताई तो नया फार्मूला सामने आया—
“अभी पैसे मत दो… पहले ₹50 हजार का साइन किया हुआ चेक दे दो, मुआवजा मिल जाए तो बाद में नकद दे देना।”
यानी भ्रष्टाचार भी अब आधुनिक हो गया है। डिजिटल इंडिया के दौर में रिश्वत भी “गारंटी मोड” पर पहुंच गई।
एसीबी ने खेल बिगाड़ दिया
शिकायत एसीबी बिलासपुर पहुंची। सत्यापन हुआ और फिर मंगलवार को पूरा जाल बिछाया गया। जैसे ही बाबू ने हस्ताक्षरित चेक स्वीकार किया, एसीबी टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
व्यंग्य का सवाल
अब सवाल यह है कि राहत योजनाओं की फाइलें सरकारी नियमों से चलती हैं या “रिश्वत की गारंटी” से?
यदि सर्पदंश से उजड़े परिवार को भी मुआवजा पाने के लिए रिश्वत का चेक देना पड़े, तो फिर जनता किस पर भरोसा करे—सरकार पर, व्यवस्था पर या एसीबी की छापेमारी पर?
एक बात तय है…
इस बार बाबू ने सोचा था कि चेक से खेल जाएगा, लेकिन एसीबी ने पूरा “चेकमेट” कर दिया।

