▪️प्रदेश में पर्यटन स्थलों व आदिवासी क्षेत्र के विकास एवं उर्वरक की उपलब्धता और किसानों के भुगतान के विषय में किया प्रश्न
पंडरिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने गन्ना किसानों के हितों के संरक्षण, समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने एवं गन्ना उद्योग के सुदृढ़ीकरण हेतु सदन का ध्यानाकर्षण किया। इसके साथ ही प्रदेश में पर्यटन स्थलों व आदिवासी क्षेत्र के विकास एवं उर्वरक की उपलब्धता और किसानों के भुगतान के विषय में प्रश्न किया। इस दौरान सदन का ध्यानाकर्षण करते हुए भावना बोहरा ने कहा कि राज्य के कबीरधाम, बेमेतरा, बालोद, सरगुजा सहित अनेक जिलों में हजारों किसान गन्ना उत्पादन पर निर्भर हैं, किंतु वर्तमान में उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य तथा समय पर भुगतान प्राप्त नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप अनेक किसान निजी गुड़ निर्माण इकाइयों को अधिक दर पर गन्ना बेचने के लिए विवश हो रहे हैं, जिससे सहकारी शक्कर कारखानों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में अन्य नकदी फसलों के लिए जहां नियत दर पर सरकारी खरीदी एवं समयबद्ध व नियमित भुगतान की सुदृढ़ व्यवस्था है, वहीं गन्ना किसानों को अपनी उपज का भुगतान प्राप्त करने के लिए 8 से 9 माह तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह स्थिति किसानों को आर्थिक संकट, कर्ज एवं अतिरिक्त ब्याज भार की ओर धकेल रही है। इस समस्या का प्रमुख कारण शक्कर कारखानों को गन्ना खरीदी एवं शक्कर उत्पादन के विरुद्ध आवश्यक कार्यशील पूंजी समय पर एवं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होना भी है। यदि कार्यशील पूंजी अग्रिम रूप से उपलब्ध कराई जाए, तो कारखाने किसानों को एफ.आर.पी. एवं अन्य देय भुगतान निर्धारित समय में कर सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था में कार्यशील पूंजी की उपलब्धता एवं भुगतान प्रक्रिया में विलंब का सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि गन्ना प्रदेश की एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है, किंतु इसे अभी भी अन्य प्रमुख फसलों के समान पर्याप्त संरक्षण एवं प्रोत्साहन प्राप्त नहीं है। गन्ना किसानों को उन्नत कृषि योजनाओं, आधुनिक सिंचाई तकनीकों, यंत्रीकरण एवं उत्पादन बढ़ाने वाली योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से जल संरक्षण एवं उत्पादन लागत में कमी के लिए गन्ना क्षेत्रों में ड्रिप सिंचाई आधारित पायलट परियोजना प्रारंभ किया जाना आवश्यक है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके तथा किसानों की आय में वृद्धि हो। गन्ना किसान प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सहकारी शक्कर उद्योग की रीढ़ हैं। अतः उनके हितों की रक्षा, समयबद्ध भुगतान एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शासन द्वारा ठोस, प्रभावी एवं दीर्घकालिक नीति लागू किया जाना अत्यंत आवश्यक है। मैं शासन से इस दिशा में त्वरित एवं सकारात्मक कार्यवाही की अपेक्षा करती हूँ।
गन्ना उत्पादक किसानों के हितों के लिए सदन के समक्ष रखी महत्वपूर्ण मांगे
गन्ना किसानों के हित के लिए उन्होंने गन्ना प्रोत्साहन राशि में वृद्धि कर किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने, गन्ना किसानों के भुगतान हेतु निर्धारित समय-सीमा तय कर उसका अनिवार्य पालन सुनिश्चित करने तथा विलंब होने पर उत्तरदायित्व तय करने, सभी सहकारी शक्कर कारखानों के लिए राज्य स्तरीय रिवॉल्विंग फंड स्थापित कर पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने, छत्तीसगढ़ में भी गन्ना किसानों के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित करने, ताकि किसानों को लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके, गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित ड्रिप सिंचाई कार्यक्रम प्रारंभ कर पर्याप्त अनुदान एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के मासिक शक्कर विक्रय कोटे में वृद्धि कर शीघ्र विक्रय एवं किसानों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराने तथा गन्ना को किसान उन्नति योजना एवं अन्य उन्नत कृषि योजनाओं में शामिल कर उन्नत बीज, कृषि यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, तकनीकी प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने की मांग भी सदन के समक्ष रखा।
भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि राज्य में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु वर्तमान में कौन-कौन सी नीतियां एवं प्रोत्साहन प्रावधान लागू हैं? विगत तीन वर्षों में प्राप्त निवेश प्रस्तावों एवं स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण प्रदान करें ? क्या राज्य के पर्यटन स्थलों के संरक्षण, सौंदर्गीकरण एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है? यदि हाँ, तो उसका विवरण उपलब्ध करायें? राज्य में नए पर्यटन स्थलों की पहचान एवं विकास के लिए पिछले तीन वर्षों में कितने प्रस्ताव प्राप्त हुए और उनमें से कितने स्वीकृत किए गए? जिसके लिखित उत्तर में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी ने बताया कि राज्य में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु वर्तमान में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 एवं अंतर्गत प्रोत्साहन प्रावधान लागू है। विगत तीन वर्षों में उद्योग संचालनालय, रायपुर एवं राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड, रायपुर कुल 79 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिसमें से 68 प्रस्तावों पर सैद्धांतिक स्वीकृति/इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किए गए हैं। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को कुल 01 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिसकी स्वीकृति जारी हो चुकी है। राज्य में पर्यटन स्थलों के विकास हेतु एक नई योजना “मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन” प्रारंभ की गयी है। इस योजना के लिये इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में राशि रू. 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य में नए पर्यटन स्थलों की पहचान एवं विकास हेतु पिछले तीन वर्षों में कुल 464 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और उनमें से 23 प्रस्ताव विकास कार्यों के एवं 02 प्रस्ताव नए पर्यटन स्थलों के चिन्हांकन के स्वीकृत किये गए हैं। राज्य के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को जानकारी एवं मार्गदर्शन देने हेतु 45 गाइडों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्वीकृति के विषय में भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में कराए जाने वाले बुनियादी विकास कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति हेतु विभाग द्वारा अधिकतम कितने दिनों की समय-सीमा तय की गई है? वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के अंतर्गत विकास कार्यों हेतु कुल कितनी राशि आबंटित एवं व्ययित की गई तथा उसमें से कितने कार्य पूर्ण हो चुके हैं और कितने लंबित हैं? जिसके लिखित उत्तर में कैबिनेट मंत्री श्री रामविचार नेताम जी ने बताया कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में कराए जाने वाले बुनियादी विकास कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति हेतु विभाग द्वारा अधिकतम कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। किन्तु प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बहुल एवं दूरस्थ क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावो का शीघ्र निराकरण किये जाने हेतु यथा संभव प्रयास किया जाता है। आदिवासी क्षेत्रों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सरपंच संघ) द्वारा विकास कार्यों में विभागीय अधिकारियों के असहयोग या स्वीकृति में विलंब संबंधी बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण मद अंतर्गत जिला कोण्डागांव की 01 शिकायत शासन स्तर पर प्राप्त हुई है जिसके परिपालन में उक्त शिकायत की जांच हेतु कलेक्टर जिला कोण्डागांव को पत्र लिखा गया है जांच की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
खरीफ वर्ष 2026 हेतु उर्वरकों की उपलब्धता के विषय में भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि खरीफ वर्ष 2026 हेतु राज्य में यूरिया, डीएपी, एनपीके एवं अन्य उर्वरकों की कुल मांग कितनी निर्धारित की गई है तथा उसके विरुद्ध केंद्र सरकार द्वारा कितनी मात्रा आवंटित की गई है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री जी ने बताया कि खरीफ 2026 हेतु राज्य में यूरिया हेतु मांग 725000 टन में आपूर्ति हेतु 525201 टन, डीएपी 300000 टन में आपूर्ति हेतु 149874 टन, एनपीके 250000 टन में आपूर्ति हेतु 207304 टन,एमओपी 30000 टन में आपूर्ति हेतु 77847 टन एवं एसएससी 200000 टन में आपूर्ति हेतु 256280 टन निर्धारित की गई। राज्य में विगत वित्तीय वर्ष 2025-26 अंतर्गत 6757 एवं खरीफ 2026 (दिनांक 30.06.2026 तक) 4337 निरीक्षण किये गये, जिसमें से उर्वरकों की कालाबाजारी/निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री एवं जमाखोरी की अनियमितता पाये जाने पर कुल 163 प्रकरण दर्ज कर उनमें से 47 का उर्वरक विक्रय अभिस्वीकृति पत्र निलंबन, 11 की अभिस्वीकृति निरस्त, 38 प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत तथा 08 प्रकरण में एफआईआर की कार्यवाही की गई है।
समर्थन मूल्य पर दलहन खरीदी एवं किसानों को भुगतान की स्थिति भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि रबी विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर चना एवं अन्य दलहन फसलों की कुल कितनी खरीदी की गई है? किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित (DBT) करने हेतु शासन द्वारा क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है तथा इसके त्वरित क्रियान्वयन के लिए किस विभागीय सॉफ्टवेयर/पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री जी ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2025-26 में प्राईस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना एवं दलहनी फसलों में केवल चना की खरीदी केन्द्रीय उपार्जन एजेंसी नेफेड एवं एन.सी.सी.एफ. के माध्यम से की गई है। प्राईस सपोर्ट स्कीम के मार्गदर्शिका अनुसार किसानों से उपार्जित उपज का स्टॉक संबंधित गोदाम में जमा होने एवं डब्ल्यू एच. आर. (वेयर हाऊस रिसीप्ट) सृजित होने के उपरांत नियमानुसार 3 कार्य दिवसों के भीतर किसानों के बैंक खातों में डी.बी.टी. (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भुगतान किया जाना है। इसके त्वरित निराकरण के लिए एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत कृषकों का डाटा एपीआई के माध्यम से नेफेड के ई-समृद्धि एवं एनसीसीएफ के ई-समयुक्ति पोर्टल में हस्तांतरित किया जाता है। हस्तांतरित डाटा के आधार पर कृषकों के फसलों के उपार्जन की राशि का भुगतान ई-समृद्धि एवं ई-समयुक्ति पोर्टल में आधार से लिंक बैंक खातों के माध्यम से की जाती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी एवं भुगतान प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न तकनीकी समस्याओं के निराकरण हेतु छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ, नेशनल ई-मार्केट लिमिटेड, संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यवाही की जाती है। पोर्टल/सर्वर संबंधी समस्याओं का समाधान कर भुगतान प्रक्रिया सुचारू रूप से संपादित किया जाता है। प्रक्रिया को सरल बनाने और विभिन्न विभागों एवं बैंकों के मध्य समन्वय हेतु राज्य स्तर पर कोई तकनीकी समिति गठित नहीं की गई है अपितु प्राईस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन, तिलहन की खरीदी हेतु योजना के क्रियान्वयन, निगरानी एवं मूल्यांकन हेतु राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमिटी गठित की गई है।

