
रायगढ़। रायगढ़ जिले के बजरमुड़ा गांव में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुए कथित ₹300 करोड़ के घोटाले पर दायर जनहित याचिका (PIL) को बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस मामले की जांच CBI और ED से कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर राशि की वसूली की जाए।हाईकोर्ट का निर्णयकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि PIL का उद्देश्य निजी हित या प्रचार-प्रसार नहीं बल्कि सार्वजनिक हित होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि झूठी अथवा निजी लाभ के लिए दाखिल याचिकाएं न्यायपालिका का समय बर्बाद करती हैं और असली पीड़ितों को न्याय से वंचित करती हैं
।अमानत राशि जब्त
महत्वपूर्ण यह रहा कि कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा PIL दायर करते समय जमा कराई गई अमानत राशि को भी जब्त करने का आदेश दिया। ऐसा कदम तब उठाया जाता है जब न्यायालय किसी याचिका को निराधार, दुर्भावनापूर्ण या दुरुपयोग की श्रेणी में पाता है।
पृष्ठभूमियह मामला छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी (CSPGCL) के गारेपेलमा कोल ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण से जुड़ा है।
ग्रामीणों को मुआवजे में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।निष्कर्ष हाईकोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित याचिका का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने यह दोहराया कि PIL केवल और केवल जनहित के लिए होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए।

