
पंडरिया। देश डिजिटल युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है और इसी क्रम में घर-घर स्मार्ट मीटर लगाए जाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर से बिजली खपत की सटीक निगरानी, बिलिंग में पारदर्शिता और बिजली चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या स्मार्ट तकनीक का विस्तार केवल बिजली व्यवस्था तक ही सीमित रहना चाहिए?




आज आवश्यकता है कि बिजली के मीटर के साथ-साथ सरकारी स्कूलों, तहसील कार्यालयों, कृषि केंद्रों और पुलिस थानों को भी आधुनिक तकनीक से लैस किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, इंटरनेट और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध हो तो विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं। इसी तरह स्मार्ट तहसील कार्यालयों में नामांतरण, सीमांकन, प्रमाण पत्र सहित अन्य राजस्व सेवाएं ऑनलाइन और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हों तो आम लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।
किसानों के लिए आधुनिक कृषि प्रयोगशालाएं भी समय की जरूरत हैं। यहां मिट्टी की जांच, फसल रोगों की पहचान, मौसम आधारित सलाह और नई कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं पुलिस थानों को आधुनिक तकनीक, साइबर अपराध जांच और डिजिटल संसाधनों से मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि बदलते अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था के साथ उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शी बिलिंग, तकनीकी खराबी का तत्काल समाधान और आसान शिकायत प्रणाली भी सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
ऐसे में सवाल यह है कि जब घर-घर बिजली का मीटर स्मार्ट बनाने की पहल हो रही है, तो स्मार्ट स्कूल, स्मार्ट तहसील, स्मार्ट कृषि केंद्र और स्मार्ट थाना बनाने की दिशा में कदम कब उठेंगे?
वास्तविक डिजिटल विकास तभी माना जाएगा, जब तकनीक का लाभ केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित न रहकर विद्यार्थी, किसान, उपभोक्ता और आम नागरिक के जीवन को भी आसान बनाए।
