रायगढ़। एनटीपीसी तलाईपाली कोयला खनन परियोजना से प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार सहित अपनी विभिन्न मांगों के बीच कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक रायगढ़ से शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।




शिकायत के अनुसार तलाईपाली, बिछीनारा, रायकेरा, नयारामपुर, अजितगढ़, कुदुरमौहा, साल्हेपाली और छोटीगुड़ा सहित आठ प्रभावित गांवों के ग्रामीण लंबे समय से एनटीपीसी तलाईपाली कोयला खनन परियोजना के खिलाफ मुआवजा, नई पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वास भूमि का चार गुना मुआवजा, तेंदूपत्ता मुआवजा और रोजगार जैसी मांगों को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्रामीणों की मांगों एवं दस्तावेजों से संबंधित जानकारी रखने वाले सुरज गुप्ता के माध्यम से एनटीपीसी परियोजना के अधिकारियों और संबंधित कंपनी के बीच कथित समझौता हुआ। इसमें ग्रामीणों की जानकारी एवं सहमति के बिना उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए मनाने के एवज में लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये की राशि दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उक्त राशि संबंधित व्यक्ति एवं उसके परिवार से जुड़े बैंक खातों में जमा कराई गई। वहीं, एनटीपीसी के अधिकारी अच्युतानंद साहू (AGM) की भूमिका को लेकर भी शिकायत में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में आरोप है कि कथित समझौते और राशि के भुगतान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिकायत के मुताबिक कथित राशि मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति तलाईपाली गांव छोड़कर चला गया और ग्रामीणों द्वारा संपर्क करने पर जवाब नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे मामले की जांच नहीं हो जाती, तब तक वे अपना मकान नहीं तोड़ेंगे और अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
एसपी से जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने एसपी रायगढ़ से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संबंधित दस्तावेजों तथा एनटीपीसी अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत की प्रतिलिपि एसडीएम घरघोड़ा, एनटीपीसी परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी कोल माइनिंग मुख्यालय, आयुक्त बिलासपुर संभाग, खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तथा संबंधित थाना प्रभारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने का उल्लेख है।
अब इस शिकायत के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर है। शिकायत में लगाए गए करोड़ों रुपये के लेन-देन के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
