
जिला बिलासपुर
बिलासपुर- जिस अस्पताल में मरीज जीवन की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वही शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय चिकित्सालय, बिलासपुर आज खुद गंभीर हालत में है। जब एक पत्रकार ने जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो जो नज़ारा सामने आया उसने स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ तोड़कर रख दी।लैब नहीं, मज़ाक चल रहा है!अस्पताल की लैब में जांच के नाम पर सिर्फ F.B. टेस्ट किया जा रहा है।ना रिपोर्ट, ना सुविधा, ना व्यवस्था।सवाल साफ है क्या इसी जांच से सभी बीमारियों का इलाज हो रहा है?
सोनोग्राफी विभाग : ताला लगा, जवाब गायबफिल्म खत्मसोनोग्राफर नहींमतलब साफ—गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज राम भरोसे।क्या किसी मातृ मृत्यु का इंतजार है?गंदगी ऐसी कि शौचालय जाना भी बीमारी को न्योताअस्पताल के बाथरूम इतने गंदे हैं कि मरीज जाने से डरते हैं।यह अस्पताल है या संक्रमण फैलाने की फैक्ट्री?मरीज भूखा, सिस्टम बेपरवाहअस्पताल में भर्ती मरीजों ने बताया दो दिन से दूध नहीं मिला।”और जो खाना बन रहा है, वह बन रहा है रेजिडेंशियल लाल टंकी के पानी से।यानी इलाज के साथ-साथ ज़हर भी परोसा जा रहा है।जर्जर भवन के नीचे बैठा स्टाफ, मौत का इंतजार?
अस्पताल की इमारत किसी भी वक्त गिर सकती है।इसके बावजूद नीचे कर्मचारी बैठकर काम कर रहे हैं।क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?प्लंबर कार्य अधूरा, पानी-नाली की भरमारपानी टपकता है, नालियां जाम हैं, गंदगी फैली है लेकिन जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं।दवा विभाग का घोटाला उजागरदवाओं की सूची एक साल कीउपलब्धता सिर्फ एक महीने कीमरीजों से सीधा संदेश इलाज चाहिए तो बाहर से दवा खरीदो।”स्वास्थ्य विभाग मौन, मरीज त्रस्तइतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूदकोई निरीक्षण नहींकोई कार्रवाई नहींकोई जवाबदेही नहींबड़ा सवालक्या यह अस्पताल मरीजों के लिए है या फाइलों के लिए?क्या किसी मौत के बाद ही जांच होगी?
क्या बिलासपुर के मरीजों की जान इतनी सस्ती है?यह खबर नहीं, चेतावनी है!अगर अब भी प्रशासन नहीं जागातो यह अस्पताल इलाज का नहीं, हादसों का केंद्र बन जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री, आयुष विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग।

