कवर्धा नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 8 के पार्षद पद के चुनाव में इस बार काफी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित इस पद पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के युवा नेता संजू लहरें ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। संजू लहरें का चुनावी प्रतीक ‘हाथी’ है, जिससे उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।

वार्ड 8 में कांग्रेस से विजय मेहता, भाजपा से अलका भूपेंद्र कुर्रे और निर्दलीय उम्मीदवार धनंजय भारतेंदु भी चुनावी मैदान में हैं। हालांकि, इस बार चुनावी मुकाबला बहुत ही कठिन हो गया है क्योंकि संजू लहरें के समर्थन में खासतौर पर युवाओं और महिलाओं का बड़ा वर्ग खड़ा हो गया है। उनकी सक्रियता, मोहल्लों में गली-गली घूमकर लोगों से जुड़ाव और स्थानीय समस्याओं को हल करने में मदद करने के कारण उन्हें लोकप्रियता मिल रही है।
पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के झंडे तले कोई भी उम्मीदवार विजयी नहीं हो पाता था, लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद भाजपा को यहाँ एक बार अलका भूपेंद्र कुर्रे के रूप में सफलता मिली थी, हालांकि उन्होंने दूसरे चुनाव में हार भी खाई। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। पिछली बार जोगी कांग्रेस ने यहाँ जीत हासिल की थी, लेकिन अब कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के विलय के बाद राजनीतिक समीकरण थोड़े जटिल हो गए हैं।
संजू लहरें की कड़ी मेहनत और उनकी हमेशा लोगों के साथ खड़े रहने की भावना ने उन्हें मोहल्ले में एक मजबूत आधार दिया है। राशन कार्ड, पेंशन, बिजली, पानी और सफाई जैसे स्थानीय मुद्दों पर उनका सक्रिय कार्य क्षेत्रवासियों के बीच उन्हें एक विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।
धनंजय भारतेंदु, जो कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके समर्थक भी उनके पक्ष में खड़े हैं और स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
अब यह देखना होगा कि ‘हाथी’ का चुनावी निशान कितना असरदार साबित होता है और संजू लहरें की बढ़ती लोकप्रियता क्या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है।
