25 लाख से अधिक सेवारत शिक्षकों के हित में संशोधन की मांग, सांसद ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पत्राचार कर समाधान का दिया आश्वासन
रायगढ़। सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ में मांग तेज हो गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समाय शिक्षक फेडरेशन, जिला इकाई रायगढ़ ने 5 सितंबर 2026 को लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस मामले में आवश्यक संशोधन की मांग की है।





फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में कहा है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। संगठन का कहना है कि जो शिक्षक पूर्व से ही शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं, उन पर नियुक्ति के बाद नया नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षक पद के लिए TET की योग्यता वर्ष 2011 से पहले अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में पूर्व में नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति के समय जो योग्यता निर्धारित थी, उसे पूरा करने के बाद सेवा में आने वाले शिक्षकों पर बाद में नई अनिवार्यता लागू करने से उनके सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है।
फेडरेशन ने भारत के राजपत्र दिनांक 23 अगस्त 2010 तथा 23 अगस्त 2017 को विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा प्रकाशित राजपत्र का हवाला देते हुए सेवारत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है।
25 लाख से अधिक शिक्षकों के भविष्य का सवाल
संगठन ने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ज्ञापन में लगभग 25 लाख से अधिक सेवारत शिक्षकों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए, ताकि वे अपनी सेवा में रहते हुए पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों का लाभ उठा सकें।
सांसद राधेश्याम राठिया ने दिया समाधान का आश्वासन
ज्ञापन सौंपने के दौरान फेडरेशन के पदाधिकारियों ने सांसद राधेश्याम राठिया से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर सेवारत शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग की।
सांसद राधेश्याम राठिया ने शिक्षकों की मांग को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि वे इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पत्र के माध्यम से चर्चा करेंगे और मामले का समाधान निकालने के लिए आवश्यक पहल करेंगे।
सांसद के इस आश्वासन के बाद सेवारत शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चल रही TET अनिवार्यता की समस्या का शासन स्तर पर सकारात्मक समाधान निकल सकता है।
फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि पूर्व से नियुक्त एवं सेवारत शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए TET की अनिवार्यता से उन्हें मुक्त करने के लिए आवश्यक संशोधन किया जाए।
फेडरेशन की प्रमुख मांग
“सेवारत शिक्षकों को राहत मिले, वर्षों की सेवा का सम्मान हो और पदोन्नति के रास्ते में TET की अनिवार्यता बाधा न बने।”
ज्ञापन के माध्यम से फेडरेशन ने केंद्र एवं राज्य सरकार से इस मामले में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
