बौद्ध विहार में समाज की आवश्यक बैठक, युवाओं से ग्रुप की चर्चाओं से आगे बढ़कर धरातल पर उतरने का आह्वान




रायपुर। बिलासपुर में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना को लेकर रायपुर के रोटरी नगर स्थित बौद्ध विहार में समाज की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत सभी उपस्थित समाजजनों ने सामूहिक वंदना के साथ की।
इसके बाद बिलासपुर की घटना सहित समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में समाज के वरिष्ठजनों के साथ बड़ी संख्या में युवा साथी भी शामिल हुए। सभी ने अपने-अपने विचार रखते हुए कहा कि बिलासपुर में हुई घटना बेहद गंभीर विषय है। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रायपुर में न हो, इसके लिए समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
हर अंबेडकर प्रतिमा पर CCTV लगाने की मांग
बैठक में प्रमुख रूप से यह सुझाव सामने आया कि रायपुर शहर में जहां-जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां CCTV कैमरे लगाए जाने चाहिए। इससे प्रतिमाओं की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी तथा किसी भी तरह की आपत्तिजनक या असामाजिक गतिविधि होने पर आरोपी की पहचान कर उसे जल्द पकड़ा जा सकेगा।
युवा साथियों ने कहा कि भविष्य में यदि इस तरह की कोई घटना सामने आती है तो समाज को केवल सोशल मीडिया या ग्रुप तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना देकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए आगे आना चाहिए।
बिलासपुर मामले में पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी
बैठक में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भोजराज गौरखेड़े ने बिलासपुर की घटना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले की शिकायत पुलिस में की जा चुकी है। CCTV फुटेज में एक महिला का वीडियो भी सामने आया है और पुलिस द्वारा मामले में कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर समाज को सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी घटना को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते संबंधित अधिकारियों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जा सके।
‘ग्रुप में चर्चा आसान, लेकिन धरातल पर उतरना जरूरी’
बैठक में युवाओं की भूमिका को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। समाजजनों ने कहा कि आज सोशल मीडिया ग्रुपों में समाज से जुड़े मुद्दों पर खूब चर्चा होती है। सवाल-जवाब और बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, लेकिन जब किसी मुद्दे पर धरातल पर उतरकर जिम्मेदारी निभाने की जरूरत पड़ती है, तब वास्तव में कितने लोग सामने आते हैं—इस पर भी समाज को आत्ममंथन करना चाहिए।
बैठक में कहा गया कि केवल ग्रुप तक सीमित रहने से बदलाव नहीं आएगा। जब समाज को जरूरत हो, तब सामने आकर अपनी जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। विशेष रूप से युवाओं को सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में समाज की जिम्मेदारी और नेतृत्व इन्हीं युवाओं के कंधों पर होगा।
हर महीने बैठक कराने पर बनी सहमति
समाज के अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया। सभी ने एक राय से कहा कि इस तरह की बैठक हर महीने आयोजित की जानी चाहिए। इससे समाज के लोगों के बीच आपसी तालमेल मजबूत होगा, सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर भी प्राप्त होगा।
बैठक का मूल संदेश यही रहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के सम्मान और प्रेरणा का केंद्र हैं। उनकी सुरक्षा के लिए जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं। यदि समाज किसी भी ऐसी घटना के प्रति समय रहते जागरूक होकर सामने आएगा तो न केवल घटनाओं पर अंकुश लगेगा, बल्कि युवाओं में भी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
बैठक में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष की टीम एवं समाज के युवा साथी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से भोजराज गौरखेड़े, विजय गजखाटे, अजय शेन्दे, हितेश गायकवाड, कुणाल गौरे, अक्षय डाहट, अरुण बागड़े, प्रफुल्ल मेश्राम, मुकेश डोंगरे, सागर बडोले, अमित देशभरतार, तन्मय बोरकर, आदित्य रामटेके, नितेश बॉम्बेडे, विपुल खोबरागड़े, सचिन गजभिये, आनंद, अंकुश रामटेके, राहुल वरके, प्रणय सोनटके, पुरुषोत्तम डोंगरे, रोहित, सयुग सोनटके और वंश सूर्यवंशी सहित अन्य समाजजन उपस्थित रहे।
