रायपुर, 18 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदाबाजार हिंसा मामले में शुक्रवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को जमानत देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
इसी मामले में सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल हिरासत की अवधि कम होना जमानत खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अमित बघेल को हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए जमानत का विरोध किया गया। वहीं, बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. सुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि बघेल के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
शीर्ष अदालत ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और जांच से संबंधित सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अमित बघेल को जमानत देने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित किए जाने और कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े एक अन्य मामले में भी अमित बघेल को अदालत से जमानत मिल चुकी है। ताजा फैसले के बाद उनके खिलाफ लंबित मामलों की कानूनी स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मंच से दिए गए भड़काऊ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई और कलेक्टोरेट व एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया गया।
इस हिंसा में सैकड़ों वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि सरकारी संपत्ति को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची। घटना के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर पत्थरों, लाठियों और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें कई अधिकारी और जवान घायल हो गए थे।
घटना के बाद पुलिस ने अमित बघेल सहित कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी की नजरें आगामी ट्रायल पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आरोप किस हद तक साबित हो पाते हैं।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल आरोपियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, बल्कि जमानत से जुड़े कानूनी सिद्धांतों पर शीर्ष अदालत की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है।

