रायपुर। सरकारी स्कूलों में प्रार्थना और मध्यान्ह भोजन के दौरान सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र एवं अन्य धार्मिक वंदनाओं को अनिवार्य किए जाने के स्कूल शिक्षा विभाग के हालिया आदेश पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत बताते हुए आदेश में तत्काल संशोधन की मांग की है।
बसपा के पूर्व जिला अध्यक्ष एड. संतोष मारकंडे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 12 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत नए शिक्षा सत्र 2026-27 में सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना और मध्यान्ह भोजन के समय सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का आयोजन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
मारकंडे का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) के अनुसार राज्य निधि से संचालित सरकारी शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की शिक्षा या धार्मिक प्रार्थना को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा की प्रार्थना अनिवार्य करना संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को प्रभावित करता है।
बसपा ने राज्य सरकार से मांग की है कि 12 जून 2026 के आदेश की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किया जाए तथा धार्मिक मंत्रों और वंदनाओं की अनिवार्यता समाप्त की जाए, ताकि संवैधानिक मर्यादा और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना बनी रहे।
बसपा का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था संविधान के मूल्यों के अनुरूप संचालित होनी चाहिए और सरकारी विद्यालयों में किसी भी धार्मिक परंपरा को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।

