
घरघोड़ा। घरघोड़ा में जमीन अधिग्रहण और मुआवज़ा वितरण के नाम पर एक और बड़े घोटाले के उजागर होने की आहट तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम भोजवानी ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि हाल ही में ट्रांसफर हुए तत्कालीन एसडीएम मोर के पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

आरोप है कि एसडीएम मोर ने घरघोड़ा से पहले ट्रांसफर होने के बावजूद लंबे समय तक पद पर बने रहकर मुआवज़ा वितरण और सर्वे कार्य में गंभीर अनियमितताएं कीं।
कोयला खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों पर निर्माण रोक के बावजूद अवैध निर्माण धड़ल्ले से हुए। बताया जा रहा है कि गलत सर्वे, फर्जी दस्तावेज़ और खास लोगों को फायदा पहुंचाने की योजनाबद्ध साज़िश के तहत करोड़ों की मुआवज़ा राशि का खेल खेला गया। सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला उजागर हुआ तो ‘बजरमुड़ा कांड’ से भी बड़ा साबित हो सकता है।
गांव-गांव में मुआवज़ा माफिया सक्रिय
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, एसडीएम मोर के कार्यकाल में राजस्व मामलों में पक्षपात और भ्रष्टाचार चरम पर रहा।
असली हकदार किसानों और मजदूरों को उनके अधिकार से वंचित कर राजनीतिक रसूखदारों और नजदीकी लोगों को मनमाने ढंग से मुआवज़ा राशि दी गई।
कई गांवों में रातों-रात भूमि अभिलेख बदले गए और करोड़ों रुपये जारी किए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने निर्माण रोक आदेश की अनदेखी करते हुए आलीशान इमारतें खड़ी करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
सरकार की अगली चाल पर सबकी निगाहें
प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम भोजवानी की चिट्ठी ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार तुरंत निष्पक्ष जांच बिठाकर आरोपियों पर कार्रवाई करेगी या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जानकारों का मानना है कि अगर जांच ईमानदारी से हुई, तो घरघोड़ा का यह ‘करोड़ों का खेल’ कई बड़े नामों को बेनकाब कर सकता है।

