घरघोडा़ (नवागढ़)।
ग्राम पंचायत नवागढ़ में जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री नल-जल योजना का हाल ऐसा है कि टंकी भी सूखी पड़ी है और नलों में भी एक बूंद पानी नहीं। ऊपर बनी विशाल टंकी अब सिर्फ दिखावे की इमारत बनकर रह गई है, जबकि नीचे ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

फोटो में साफ नजर आता है कि गांव में नल लगाए गए हैं, प्लेटफॉर्म भी बने हैं, लेकिन उनमें पानी का कोई अता-पता नहीं। टंकी खाली खड़ी है और नल सूखे—यानी पूरी व्यवस्था ही “नाम के लिए” चल रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना का लाभ उन्हें आज तक नहीं मिला।

एक ग्रामीण ने व्यंग्य करते हुए कहा—
“टंकी देखकर लगता है पानी मिलेगा, लेकिन नल खोलो तो सिर्फ हवा ही मिलती है!”
महिलाओं की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। उन्हें आज भी दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि कागजों में हर घर जल पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

हैंडपंपों की हालत भी कुछ खास नहीं—कहीं गंदगी, तो कहीं उपेक्षा। इससे साफ है कि व्यवस्था जमीन पर पूरी तरह लचर है।

अब सवाल यह है—
क्या योजना सिर्फ फोटो और रिपोर्ट तक ही सीमित है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी इन सूखी टंकियों और नलों को देखेंगे?
फिलहाल नवागढ़ में “जल जीवन मिशन” नहीं, बल्कि “जल के बिना जीवन” की स्थिति बनी हुई है।
