
पंडरिया। सतनामी समाज के आराध्य परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी एवं सतनामी समाज के विरुद्ध कथित रूप से जातिसूचक गाली-गलौज, अभद्र टिप्पणी और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में समाज के लोगों ने पुलिस से शिकायत कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
पंडरिया थाना प्रभारी को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 10 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 1 बजकर 50 मिनट पर फोन कॉल के माध्यम से चिरंजीव चंद्राकर नामक व्यक्ति ने सतनामी समाज और बाबा गुरु घासीदास जी के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक, अश्लील एवं जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। आवेदन में संबंधित व्यक्ति के पिता का नाम चंद्राकर तथा मोबाइल नंबर का भी उल्लेख किया गया है।
ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बताया साक्ष्य

शिकायत में कहा गया है कि कथित टिप्पणी से संबंधित ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट समाज के लोगों के पास साक्ष्य के रूप में सुरक्षित हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस घटना से सतनामी समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। साथ ही, अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को सार्वजनिक रूप से जाति के आधार पर अपमानित किए जाने तथा समाज में वैमनस्य फैलने की आशंका भी जताई गई है।
निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग

आवेदन में पुलिस प्रशासन से संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर निष्पक्ष जांच करने और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि किसी भी समाज, धर्म या उसके आराध्य के प्रति अपमानजनक टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारतीय न्याय संहिता और एससी-एसटी अधिनियम का उल्लेख
शिकायत आवेदन में भारतीय न्याय संहिता
(BNS) की धारा 196, 299, 302, 351(2) और 352 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(1)(u) के तहत कार्रवाई की मांग का उल्लेख किया गया है। इन धाराओं के तहत अपराध बनता है या नहीं, यह कथित घटना के वास्तविक तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस जांच पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, उपलब्ध आवेदन के आधार पर यह शिकायत और कार्रवाई की मांग का मामला है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष, पुलिस द्वारा शिकायत पर की गई कार्रवाई तथा एफआईआर दर्ज होने की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
