माध्यमिक शाला अ.जा मो.घरघोड़ा में कल एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में लोक भाषा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना का विकास करना था। उक्त कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को लोक भाषा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि लोक भाषा न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, बल्कि यह हमारे सामाजिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित औराईमुड़ा स्कूल की व्याख्याता श्रीमती विजया पंडा ने विद्यार्थियों को साहित्य में लोकभाषा के योगदान के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपरा का व्याख्यान करते हुए समाज में व्याप्त गुणों के समग्र स्वरूप पर

ध्यानाकर्षित किया। इसके साथ ही बच्चों को छत्तीसगढ़ के लोकगीतों में भाव प्रवणता का प्राणतत्व समझाते हुए पंडवानी, भरथरी, चंदैनी, ढोलामारू, बांस गीत, ददरिया, सुआ गीत, करमा, डंडा, फाग, चनौनी, राउत गीत, पंथी गीत के बारे में बताते हुए कुछ गीतों को विद्यार्थियों के समक्ष अपने मधुर कंठ से गाकर भी सुनाया। उपरोक्त सभी गीतों में उन्होंने ददरिया को छत्तीसगढ़ी गीतों का राजा होने की भी जानकारी दी।इस कार्यक्रम में शालेय जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विद्यार्थियों को विभिन्न

दायित्व सौंपे गए। जैसे कि छात्रों को क्लास मॉनिटर, मिड-डे मील (MDM) प्रभारी, पर्यावरण प्रभारी जैसे विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया और प्रत्येक बच्चों को पदनाम वर्ग अर्थात बैच भी वितरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता और नेतृत्व गुणों का विकास करना था। वहीं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती रीति पंडा ने सभी छात्र-छात्राओं को प्राप्त जिम्मेदारी का निष्ठा पूर्वक निर्वहन करने शपथ दिलाया। विद्यार्थियों ने भी शालेय जिम्मेदारियों को लेकर अपनी उत्सुकता और जिम्मेदारी निभाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। श्रीमती पंडा बच्चों के समग्र कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्हें अतिथियों के स्वागत के भाव और तरीके सिखाने के साथ-साथ उनको नृत्य और नाट्य कला में भी प्रशिक्षित करने का कार्य कर रहीं हैं। उन्होंने बच्चों के नृत्य और अभिनय कौशल का मूल्यांकन करने एक ट्रायल सत्र भी आयोजित किया। इस दौरान बच्चों ने अपनी नृत्य और एक्टिंग के विभिन्न

पहलुओं का प्रदर्शन किया। आपको बता दें कि श्रीमती पंडा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में उनके कौशल विकास के प्रति पूरी प्रतिबद्धता के साथ सेवारत हैं। उनके द्वारा बच्चों के भविष्य के हर पहलू पर गौर करते हुए उन्हें उनके हर नेक कदम पर प्रोत्साहित करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए मार्गदर्शित कर रही हैं। उनकी इस पहल से बच्चों में कला के प्रति रुचि और आत्म अभिव्यक्ति के नए अवसर उत्पन्न होना स्वाभाविक है। बहरहाल बच्चों के सुनहरे कल और उनके व्यक्तित्व को चमकदार बनाने की दिशा में उक्त स्कूल के शिक्षकों में पूरी लगन देखी जा सकती है। जिसके फलस्वरूप निश्चित ही आज स्कूल की प्रतिष्ठा भी ऊंची नजर आती है।विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता और समग्र विकास के लिए किए जा रहे इस उत्कृष्ट कार्य में अध्यापिका सुश्री लीना सिंह ठाकुर का भी विशेष योगदान है। उनकी मेहनत और समर्पण ने विद्यालय की शिक्षा पद्धति में न केवल नवाचार को जन्म दिया है, बल्कि छात्रों के शैक्षिक विकास में भी अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरा, जो उन्हें लोकभाषा और जिम्मेदारी का महत्व समझने में मदद करेगा। इस अवसर पर शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुनील जोल्हे भी उपस्थित रहे। जहां उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में ध्यान के महत्व को अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से अवगत कराया।रिपोर्टर – सुनील जोल्हे
