रायगढ़।
राज्य पुलिस प्रशासन में किए गए अहम फेरबदल के तहत रायगढ़ जिले को नया पुलिस अधीक्षक मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी श्री शशिमोहन सिंह को रायगढ़ का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि वर्तमान एसपी श्री दिव्यांग कुमार पटेल को रेल पुलिस अधीक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस प्रशासनिक बदलाव को प्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम माना जा रहा है।

नवपदस्थ एसपी शशिमोहन सिंह अपनी अनुशासित कार्यशैली, स्पष्ट निर्णय क्षमता और संवेदनशील पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं। रायगढ़ जैसे आदिवासी बहुल और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में उनके सामने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं संवाद को और मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। नशे के खिलाफ अभियान, संगठित अपराधों पर सख्ती और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है।
शशिमोहन सिंह छत्तीसगढ़ कैडर के 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे इससे पूर्व जशपुर जिले में एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पुलिसिंग के साथ-साथ वे अभिनय, लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। सामाजिक मुद्दों पर आधारित लघु फिल्मों और थिएटर के माध्यम से वे जन-जागरूकता अभियानों, विशेषकर नशे से दूर रहने जैसे विषयों पर समाज को जागरूक करते रहे हैं। उनकी यह बहुआयामी पहचान रायगढ़ में पुलिस-जनसंपर्क को एक नई दिशा दे सकती है।
वहीं, लंबे समय तक रायगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक रहे श्री दिव्यांग कुमार पटेल ने अपने कार्यकाल में अपराध नियंत्रण, अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई और पुलिस-जनसमन्वय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। अब उन्हें रेल पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नई पदस्थापना से रेल यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा और रेलवे क्षेत्रों में अपराधों पर सख्त नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासनिक जानकारों के अनुसार यह फेरबदल अधिकारियों के अनुभव और कार्यकुशलता के बेहतर उपयोग की सोच के साथ किया गया है। जहां रायगढ़ में शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिसिंग को नई दिशा मिलने की संभावना है, वहीं दिव्यांग पटेल के अनुभव से रेल पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर यह प्रशासनिक बदलाव न केवल अधिकारियों के लिए नई जिम्मेदारी का संकेत है, बल्कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
