तकनिकी शिक्षा से युवाओं के कौशल प्रशिक्षण, पंडरिया में पर्यटन को बढ़ावा एवं उचित मूल्य दुकानों की स्थापना हेतु विधानसभा में विधायक भावना बोहरा ने की मांग
▪️प्रश्नकाल में वनांचल क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुविधाओं, रेडी टू ईट योजना और महिला व बाल तस्करी के विषय में पूछा प्रश्न
पंडरिया । पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने बजट सत्र के दौरान प्रदेश व कबीरधाम जिले से जुड़े प्रमुख विषयों और मुद्दों को सदन के समक्ष प्रमुखता से रखा। इस दौरान उन्होंने बजट चर्चा के दौरान क्षेत्र के युवाओं के कौशल विकास व प्रशिक्षण हेतु औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना, विधानसभा के वनांचल क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और वनांचल व विभिन्न क्षेत्रोंन में उचित मूल्य दूकान की स्थपाना तथा जर्जर दुकानों के मरम्मत की मांग प्रमुखता से रखा। भावना बोहरा ने तकनिकी शिक्षा विभाग अंतर्गत ग्राम बाजार चारभाठा एवं नगर पंचायत पांडातराई में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना, सहकारिता विभाग अंतर्गत ग्राम बांगर, ढोठमानवापारा, मगरवाह सरइपतेराकला,नगर पांडातराई के नयापारा वार्ड 2 एवं ग्राम मजगांव में नवीन शासकीय उचित मूल्य दूकान खोलने एवं ग्राम बहरमुड़ा, सेन्हाभाठा, बसनी, रेंगाबोड़, पटुआ, माकरी, दनियाखुर्द एवं नवागाँवखुर्द स्थित उचित मूल्य दूकान की मरम्मत कार्य की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग अंतर्गत वनांचल क्षेत्र कुकदूर में वन अग्नि नियंत्रण हेतु फायर वॉच टावर और फायर कंट्रोल सेन्टर की स्थापना और भैंसाओदार प्राकृतिक स्थल पर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर, व्यू पॉइंट और ट्रैकिंग ट्रेल, पर्यटक कॉटेज विकसित करने की मांग भी की।
भावना बोहरा ने प्रश्नकाल के दौरान वनांचल एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र के विषय में प्रश्न किया कि कबीरधाम जिले के वनांचल एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में संचालित ऐसे कितने आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जो जनवरी, 2026 तक पक्के भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली तथा सुरक्षित भंडारण जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं? उक्त आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा क्या समयबद्ध कार्ययोजना बनाई गई है? विभाग द्वारा कबीरधाम जिले के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में संचालित ऐसे कितने आंगनबाड़ी केन्द्रों को चिन्हित किया गया है, जहाँ समुचित परिवहन व्यवस्था के अभाव में पोषण आहार नियमित एवं समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है? जिसके लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने बताया कि कबीरधाम जिले के वनांचल एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों मे जनवरी 2026 की स्थिति में 54 केन्द्रों में पक्के भवन, 192 केन्द्रों में शौचालय एवं 326 केन्द्रों में बिजली नहीं हैं। वित्तीय संसाधनों एवं बजट उपलब्धता के आधार पर आंगनबाड़ी केन्द्रो में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। कबीरधाम जिले में खाद्य विभाग द्वारा पण्डरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुकदुर परियोजना के 02 ग्राम पंचायत के उचित मूल्य के दूकान को पहुंचविहीन क्षेत्र के रूप में चिन्हांकित किया गया है। जिसके अंतर्गत 11 आंगनबाड़ी केन्द्र शामिल है किन्तु दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में संचालित सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार नियमित रूप से समय पर उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने प्रदेश के जिलों में रेडी टू ईट योजना के संचालन के विषय में प्रश्न किया कि वर्तमान में रेडी टू ईट योजना प्रदेश के कितने जिलों में लागू की गई है? शेष जिलों मे यह योजना कब तक लागू कर दी जावेगी? क्या इसके लिए विभाग द्वारा समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई है ? वर्तमान में कितने आँगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण आहार प्रदाय का दायित्व निर्वहन महिला स्व सहायता समूहों के द्वारा किया जा रहा है तथा अन्य आँगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण आहार प्रदाय कार्य किनके द्वारा किया जा रहा है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 06 जिलों में रेडी टू ईट का निर्माण व प्रदाय कार्य महिला स्व सहायता समूहों को सौंपा गया है। शेष जिलों मे यह कार्य प्रारंभ किये जाने की निश्चित समय सीमा बताया जाना संभव नहीं है। प्रदेश की 6673 आंगनबाड़ी केन्द्रों में महिला स्व सहायता समूह द्वारा एवं 45867 आंगनबाड़ी केन्द्रों में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड रायपुर द्वारा रेडी टू ईट का प्रदाय किया जा रहा है।
भावना बोहरा ने महिला व बाल तस्करी एवं बाल श्रम से संबंधित दर्ज प्रकरण के विषय में प्रश्न किया कि विगत दो वर्षों में रायपुर एवं दुर्ग जिलों में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में मुक्त कराए गए बच्चों में से कितने छत्तीसगढ़ के निवासी थे तथा कितने अन्य राज्यों से संबंधित थे? इन बच्चों के पुनर्वास एवं सुरक्षित गृह वापसी हेतु कुल कितनी राशि व्यय की गई है? क्या विगत वित्तीय वर्ष में राज्य के बाल संरक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था का नियमित निरीक्षण कराया गया है? यदि हाँ, तो निरीक्षण के दौरान क्या खामियाँ पाई गईं, कृपया बतावें तथा की गई कार्यवाही एवं सुधारात्मक कदमों की जानकारी देवें ? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में रायपुर एवं दुर्ग जिले में चलाए गए रेस्क्यू अभियान में 893 बच्चे मुक्त कराए गए है, जिनमें छत्तीसगढ़ के 759 व अन्य राज्यों के 134 बच्चे है, इन बच्चों के पुनर्वास एवं सुरक्षित गृह वापसी हेतु 98322 रू. राशि व्यय की गई है। विगत वित्तीय वर्ष में राज्य के बाल देखरेख संस्थाओं का नियमित निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ संस्थाओं में सुरक्षा की दृष्टि से भवन के ऊपर जाली लगाने, सीसीटीवी कैमरे बढ़ाए जाने, बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने, बाउंड्रीवाल में लोहे की जाली लगाने, आपातकालीन हैल्प लाईन नम्बर का प्रदर्शन, जर्जर भवन से अन्य भवन में स्थानांतरण एवं सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने के सम्बंध में निरीक्षण दल के द्वारा सुझाव व निर्देश दिए गए थे। निरीक्षण में प्राप्त सुझाव व निर्देश अनुसार सुधारात्मक कार्यवाही कर ली गई है। बच्चों के सर्वोत्तम हित में बाल देखरेख संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा के लिए निरंतर निरीक्षण, सभी संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ समीक्षा एवं समय समय पर सुरक्षात्मक उपाय हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये है। बाल देखरेख संस्थाओं के अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण, आवश्यकतानुसार एक संस्था से दूसरी संस्था में बच्चों का स्थानांतरण, संस्था में आवश्यकतानुसार अधोसंरचनात्मक सुधार, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, आपातकालीन नंबरों का संस्था के महत्वपूर्ण स्थानों में प्रदर्शन, बाल देखरेख संस्था में सी.सी.टी.वी. कैमरों की स्थापना, पालियों में कर्मचारियों की ड्यूटी सहित अन्य आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए गए है।
