रायगढ़ जिले के घरघोड़ा इलाके में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के कारण स्थानीय लोगों में भारी रोष है।
इलाके के लोगों ने बताया कि आवारा कुत्तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है और इन कुत्तों के झुण्ड बिना किसी Provocation के राह चलते लोगों पर हमला कर काटते हैं।
इसी बीच कल एक राह चलते व्यक्ति को आवारा कुत्तों ने हमला कर काट लिया, जिससे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवारा कुत्तों का नियंत्रण न होना और नसबंदी-टीकाकरण कार्यक्रमों का सही ढंग से न होना इन हमलों का मुख्य कारण है।
लोग समझते हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की वृद्धि और बिना नियमन के आवारा कुत्तों का घूमना बच्चों, महिलाओं और वृद्धों के लिए ख़तरा बन चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों (stray dogs) के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कुत्तों के नसबंदी (sterilisation) और वैक्सीनेशन, सार्वजनिक रूप से आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक, तथा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा और प्रबंधित करने के उपाय शामिल हैं।
कोर्ट ने राज्यों और नगर निकायों से कर्तव्यों को प्रभावी रूप से लागू करने और आवारा कुत्तों को उचित नीतियों के तहत संभालने के लिए लिखित जवाब भी मांगे हैं। �
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश लागू होने के बावजूद रायगढ़ सहित राज्य के कई हिस्सों में इन दिशाओं का पालन व्यापक स्तर पर नहीं हो पाया है।
कई इलाकों में नसबंदी और टीकाकरण अभियान सुस्त हैं और आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए स्पष्ट रणनीति का अभाव है।
स्थानीय लोगों ने छत्तीसगढ़ शासन और नगर निकाय से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए ज़ोर देकर कहा कि आवारा कुत्तों के प्रभावी नियंत्रण के लिए नसबंदी-टीकाकरण कार्यक्रमों को सही ढंग से लागू किया जाए और सुरक्षित आश्रय सुविधाएँ दी जाएँ, ताकि आगे किसी गंभीर घटना से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस बीच, सरकार की रिपोर्टों के अनुसार राज्य में कुत्तों द्वारा काटे जाने के हजारों मामले दर्ज हुए हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
