
ग्राम पंचायत बफरा, जनपद पंचायत खैरागढ़, जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई में रोजगार सहायक द्वारा हितग्राहियों से अवैध रूप से पैसे लेने के संबंध में विगत दिनों कुछ समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया माध्यमों में प्रकाशित खबरों को प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से संज्ञान में लिया।
खबरों में यह आरोप लगाया गया था कि ग्राम पंचायत बफरा में विभिन्न शासकीय योजनाओं, विशेषकर मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित कार्यों के बदले हितग्राहियों से धनराशि की मांग की जा रही है।
उक्त समाचारों के प्रकाशन के पश्चात जनपद पंचायत खैरागढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम को निर्देशित किया गया कि वह ग्राम पंचायत बफरा पहुंचकर मामले से संबंधित सभी पक्षों, दस्तावेजों एवं हितग्राहियों के बयान लेकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करे।*जांच के लिए ग्राम पंचायत बफरा पहुंची प्रशासनिक टीम*निर्धारित तिथि को जनपद पंचायत की जांच टीम ग्राम पंचायत बफरा पहुंची।
टीम द्वारा ग्राम पंचायत कार्यालय में खुली बैठक आयोजित कर सभी संबंधित हितग्राहियों, ग्रामवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं रोजगार सहायक को उपस्थित रहने हेतु सूचित किया गया। जांच का मुख्य उद्देश्य यह था कि समाचारों में लगाए गए आरोपों की सत्यता को तथ्यात्मक रूप से परखा जाए।जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रोजगार सहायक पर लगाए गए आरोप मुख्य रूप से ग्रामवासी हेमलाल साहू द्वारा लगाए गए थे, जिनके माध्यम से उक्त समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित करवाई गई थीं। शिकायतकर्ता द्वारा यह दावा किया गया था कि उसकी माता से शासकीय कार्य के बदले पैसे की मांग की गई थी।*हितग्राहियों के लिखित बयान, किसी भी प्रकार का लेन–देन प्रमाणित नहीं*जांच टीम द्वारा सभी संबंधित हितग्राहियों को एक–एक कर बुलाकर उनके लिखित बयान दर्ज किए गए।
बयान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही तथा किसी भी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप नहीं किया गया। जांच में शामिल हितग्राहियों ने स्पष्ट रूप से यह कहा कि उनसे रोजगार सहायक श्री राजेश साहू द्वारा किसी भी प्रकार का पैसा नहीं लिया गया है।सभी हितग्राहियों ने अपने हस्ताक्षरयुक्त लिखित बयान में यह स्वीकार किया कि योजनाओं का लाभ उन्हें नियमानुसार प्राप्त हुआ है और किसी प्रकार की अवैध मांग या लेन–देन की घटना उनके संज्ञान में नहीं है।*शिकायतकर्ता अपने ही आरोप को प्रमाणित करने में असफल*जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी तब सामने आई जब शिकायतकर्ता हेमलाल साहू से उसके आरोपों के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसकी माता से धनराशि की मांग की गई थी, किंतु जांच के दौरान वह अपनी माता को जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाया।
जांच टीम द्वारा कई बार अवसर दिए जाने के बावजूद शिकायतकर्ता न तो अपनी माता को सामने ला सका और न ही कोई लिखित, मौखिक अथवा दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत कर पाया, जिससे उसके आरोपों की पुष्टि हो सके। यह तथ्य जांच प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि जिस आधार पर आरोप लगाए गए थे, वही व्यक्ति (शिकायतकर्ता की माता) जांच के दौरान उपस्थित नहीं हो सकी।
*प्रशासनिक जांच में आरोप तथ्यहीन पाए गए*जांच टीम ने सभी बयानों, उपलब्ध दस्तावेजों एवं परिस्थितिजन्य तथ्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि रोजगार सहायक श्री राजेश साहू के विरुद्ध लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार, तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जांच में किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन–देन, अवैध वसूली या भ्रष्टाचार से संबंधित कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आया।प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय कर्मचारियों एवं पंचायत कर्मियों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली अपुष्ट एवं अप्रमाणित खबरों का प्रकाशन न केवल संबंधित व्यक्ति के लिए, बल्कि संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी हानिकारक होता है।
*जनपद पंचायत प्रशासन का स्पष्ट संदेश*जांच पूर्ण होने के पश्चात जनपद पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी भी व्यक्ति के पास किसी प्रकार की ठोस शिकायत या प्रमाण हों, तो वह नियमानुसार सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करे। बिना प्रमाण के आरोप लगाना और उन्हें सार्वजनिक माध्यमों से प्रसारित करना विधिसम्मत नहीं है ।प्रशासन ने यह भी दोहराया कि ग्राम पंचायत बफरा में सभी शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता एवं नियमों के तहत किया जा रहा है तथा किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
