BhokochandBhokochand
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Search
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
Reading: मनेन्द्रगढ़.चिरमिरी.भरतपुर : छेरछेरा पर्व पर विशेष लेख : छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर है छेरछेरा: महेन्द्र सिंह मरपच्ची.
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
BhokochandBhokochand
Font ResizerAa
Search
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
Blog

मनेन्द्रगढ़.चिरमिरी.भरतपुर : छेरछेरा पर्व पर विशेष लेख : छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर है छेरछेरा: महेन्द्र सिंह मरपच्ची.

Basant Ratre
Last updated: January 13, 2025 4:54 pm
Basant Ratre 113 Views
Share
9 Min Read
SHARE

मनेन्द्रगढ़.चिरमिरी.भरतपुर – 13 जनवरी 2025छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में गहरी जड़ें जमाए हुए कई पर्व और उत्सव हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देते हैं। इनमें से एक प्रमुख और विशिष्ट पर्व छेरछेरा है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत करता है और किसानों के जीवन से जुड़ा हुआ है। छेरछेरा पर्व कृषि पर आधारित होने के कारण यह नए कृषि मौसम और फसल कटाई के बाद मनाया जाता है, जिसे हर साल पौष पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।समाज में सामूहिकता और सहयोग का प्रतीक है छेरछेराछेरछेरा पर्व की शुरुआत में ग्राम देवताओं की पूजा होती है, जिसे ग्रामीण अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तथा कृषि की उन्नति की कामना से करते हैं। यह पर्व फसल के कटाई के बाद एक सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो समाज के सभी वर्गों को एकजुट करता है। इस दिन विशेष रूप से छोटे बच्चे, युवक और युवतियां हाथ में टोकरी या बोरियां लेकर घर-घर छेरछेरा मांगने निकलते हैं। वे ष्छेर छेरता माई मोरगी मार दे, कोठे के धान ला हेर देष् जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए घरों के सामने जाते हैं और वहां से नया चावल और नकद राशि प्राप्त करते हैं। यह सब एक सामूहिक खुशी का हिस्सा होता है, जो पूरे गांव को उत्साहित और सामूहिक रूप से एकजुट करता है।जनजातीय समुदाय की धार्मिक मान्यताएं और परंपराएंसमाज की एकता और सामूहिक सहयोग को दर्शाते हुए यह पर्व केवल एक पारंपरिक उत्सव ही नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन जाता है। छेरछेरा के दौरान लोगों द्वारा इकट्ठा किया गया चावल और धन गरीब और जरूरतमंद परिवारों में बांटा जाता है, जिससे ग्रामीणों के बीच सहकारिता और एकजुटता की भावना और मजबूत होती है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक रूप से अनाज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का काम किया जाता है, जिसे ग्रामीण बैंकिंग प्रणाली के रूप में देखा जा सकता है। यह प्रणाली सामाजिक सुरक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां ग्रामीण अपनी जरूरतों को साझा करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और जैव विविधता संरक्षणसरगुजा में छेरछेरा पर्व का विशिष्ट रूप और यहां की परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं। सरगुजा के गांवों में यह पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है, और यह स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यहां के बच्चे विशेष रूप से छेरछेरा के दिन हर घर के सामने पहुंचते हैं, और इस दिन उन्हें नया चावल और धन प्राप्त होता है। यह पर्व न केवल कृषि का उत्सव है, बल्कि यह लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपनी अहमियत बनाए रखता है। गांवों में छेरछेरा के दौरान नृत्य और गीत की विशेष भूमिका होती है। महिलाएं जहां सुगा गीत गाती हैं, वहीं पुरुष शैला गीत गाकर नृत्य करते हैं। साथ ही युवा वर्ग भी डंडा नृत्य करते हुए घर-घर पहुंचता है। यह नृत्य और गीत स्थानीय परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा होते हैं, जो समाज की एकता और विविधता को बढ़ावा देते हैं।इसके अलावा छेरछेरा के दौरान होने वाले कला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। इसमें लोकनृत्य, संगीत, नाटक और अन्य प्रदर्शन शामिल होते हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना और संस्कृति को संजोना होता है।प्रकृति और कुल देवी देवताओं का करते है सम्मानछेरछेरा पर्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से सभी लोग अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर खुशी मनाते हैं और एक-दूसरे से सहयोग करते हैं। यह पर्व उन सभी परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो हमारे समाज में भाईचारे और प्यार की भावना को बढ़ावा देती हैं। छेरछेरा के दिन विभिन्न गांवों में खेलकूद, प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिनमें लोग अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन करते हैं। ये कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का साधन होते हैं, बल्कि यह समाज में सामूहिकता और सामूहिक सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।छेरछेरा पर्व में प्रकृति और देवताओं का सम्मान एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है। इस पर्व के दौरान लोग न केवल अपने खेतों से काटे गए धान की पूजा करते हैं, बल्कि वे पेड़-पौधों, जल, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का भी सम्मान करते हैं। यह पर्व पर्यावरण के संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने का एक बड़ा अवसर होता है। लोक पूजा के माध्यम से लोग यह संदेश देते हैं कि हम प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पर्यावरण का संरक्षण करें।जैव विविधता के संरक्षण में छेरछेरा पर्व का योगदान महत्वपूर्ण है। पर्व के दौरान प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण किया जाता है, और यह संदेश फैलाया जाता है कि अगर हम प्रकृति का ध्यान नहीं रखेंगे तो हमारा अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। यह पर्व न केवल कृषि और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सांस्कृतिक संरक्षण का भी आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसमें लोकगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।जनजातीय समुदायों के लिए छेरछेरा पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आदिवासी लोग इसे न केवल एक कृषि पर्व के रूप में मानते हैं, बल्कि इसे अपने जीवन और संस्कृति के एक अभिन्न हिस्सा के रूप में देखते हैं। जनजातीय समुदायों में यह विश्वास है कि उनके देवता और प्रकृति की शक्तियां उनके जीवन के हर पहलू में मौजूद हैं, और छेरछेरा पर्व के माध्यम से वे इन शक्तियों का सम्मान करते हैं। जनजातीय समुदाय के लोग इस दिन विशेष रूप से प्रकृति पूजा करते हैं और अपने ग्राम देवताओं को धन्यवाद अर्पित करते हैं। उनका मानना है कि यह पर्व उन्हें उनके जीवन की कठिनाइयों से उबारने के लिए देवताओं का आशीर्वाद प्रदान करता है। साथ ही, इस दिन जनजातीय समुदाय के लोग नई फसल को देवताओं को समर्पित करते हैं, ताकि आगामी वर्ष में उनकी कृषि समृद्ध हो और परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहें। इस पर्व के दौरान जनजातीय समुदाय परंपरागत धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, जिसमें वे अपने देवताओं के सामने विशेष रूप से अनाज, फल और फूल चढ़ाते हैं, ताकि उन पर देवताओं की कृपा बनी रहे। वे इस दिन को एक तरह से धार्मिक आभार के रूप में मनाते हैं, जिसमें उनके समुदाय की समृद्धि, शांति और सौहार्द की कामना की जाती है।छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व न केवल किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि यह समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर अपने सुख-दुख साझा करने चाहिए और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना चाहिए।इस पर्व का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, और यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। चाहे वह नृत्य और संगीत हो, लोकगीत हो या फिर समाजिक सहयोग हो, छेरछेरा पर्व ने हमेशा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भविष्य में भी यह इसी तरह से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का काम करेगा।

Related

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link
By Basant Ratre
Follow:
Bhokochand.com एक हिंदी न्यूज़ पोर्टल है , इस पोर्टल पर छत्तीसगढ़ सहित देश विदेश की ताज़ा खबरों को प्रकाशित किया जाता है|
Previous Article 1736767031 f6b90d12a97379e11b44 जशपुरनगर : बोखी में जल जीवन मिशन का कार्य पूर्ण.
Next Article बलरामपुर : मुख्यमंत्री प्रवास के दौरान हेलीपैड स्थल पर नो ड्रोन फ्लाई जोन एरिया घोषित.
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe

Latest News

स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे और धर्म ध्वजा के साथ आगे बढ़ी विधायक भावना बोहरा और कांवड़ियों की कांवड़ यात्रा, राष्ट्रभक्ति और सनातन आस्था का दिखा अद्भुत संगम
कवर्धा August 15, 2026
पुष्प, हरियाली और लोकपरंपराओं के बीच गूंजा नारी शक्ति का संदेश
राजधानी August 14, 2026
spiral null 1786713256307
घरघोड़ा में लहराया तिरंगा, राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नगर 14 अगस्त को हाईस्कूल ग्राउंड से जयस्तंभ चौक तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा, विद्यार्थियों से लेकर जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी तक हुए शामिल
घरघोडा़ रायगढ़ August 14, 2026
विधायक भावना बोहरा और कांवड़ियों के भव्य स्वागत में हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजा पंडरिया, कांवड़ियों ने जलेश्वर महादेव में किया जलाभिषेक
कवर्धा August 14, 2026

Categories

  • Blog
  • कवर्धा
  • खेल
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • डभरा
  • तमनार
  • पंडरिया
  • भटगांव
  • राजधानी
  • रायगढ़
Copyright © 2024 Bhokochand.com. All Rights Reserved. Design by DEV
  • Home
  • घरघोडा़
  • छत्तीसगढ़
  • न्यायधानी
  • राजधानी
  • राजनीति
  • रायगढ़
  • Blog
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?