रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने रायगढ़ जिला प्रवास पर पहुंचे अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी जी से मुलाकात कर संघ की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अधीक्षक संवर्ग की लंबित समस्याओं के साथ छात्रावास एवं आश्रमों के संचालन से जुड़े कई ज्वलंत विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

संघ ने अध्यक्ष के समक्ष अधीक्षक संवर्ग की सेवा संबंधी समस्याओं, कार्य के घंटों के निर्धारण, कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति के अवसर और छात्रावास संचालन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को प्रमुखता से रखा। संघ का कहना है कि छात्रावास अधीक्षक आदिवासी विद्यार्थियों की देखरेख, शिक्षा के अनुकूल वातावरण तैयार करने और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान होना आवश्यक है।
24 घंटे की जिम्मेदारी, लेकिन सुविधाओं का भी हो ध्यान
संघ ने अधीक्षकों से संबंधित कार्य व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने तथा सेवा शर्तों में आवश्यक सुधार की मांग उठाई। इसके साथ ही अधीक्षक संवर्ग में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि कर्मचारियों को सेवाकाल में आगे बढ़ने के उचित अवसर मिल सकें।
मेस बजट और ऑनलाइन उपस्थिति की समस्याएं भी उठाईं
ज्ञापन में छात्रावासों के मेस बजट में कटौती, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में आने वाली तकनीकी परेशानियों और आवश्यक संसाधनों की कमी जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया। संघ ने मांग की कि विद्यार्थियों की भोजन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए मेस बजट से संबंधित नियम व्यावहारिक बनाए जाएं।
इसके अलावा छात्रावासों में कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा चिकित्सा, सफाई सामग्री, बर्तन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई।
आदिवासी विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा
रायगढ़ प्रवास के दौरान आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी जी को ज्ञापन सौंपकर संघ ने अधीक्षक संवर्ग की समस्याओं और छात्रावासों की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। संघ को उम्मीद है कि इन विषयों पर सकारात्मक पहल होगी और संबंधित समस्याओं के समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छात्रावास अधीक्षक संघ द्वारा उठाई गई मांगों और आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़ी व्यवस्थागत समस्याओं पर संबंधित स्तर पर क्या पहल की जाती है।
