। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में एस.एस. वूमेन क्लब के तत्वावधान में ‘नारी शक्ति संवाद’ एवं हरेली-सावन मिलन समारोह का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, हरियाली और परंपराओं से सजे इस आयोजन में विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने कहा कि “महिलाएं समरूपता, संबंध, समाधान और सौंदर्य का स्वरूप हैं। महिलाएं जहां होती हैं, वहां आसपास की सभी चीजों को व्यवस्थित और सुंदर बनाने का प्रयास करती हैं।” उन्होंने कहा कि समाज और संस्थानों के विकास में महिलाओं की सक्रिय एवं अग्रणी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय में एस.एस. वूमेन क्लब का गठन किया गया है, जो महिलाओं को संवाद, सहयोग और रचनात्मक सहभागिता का मंच उपलब्ध कराएगा।
कुलपति ने कहा कि क्लब के माध्यम से महिलाएं अपने अनुभव, प्रतिभा और क्षमताओं को साझा करते हुए व्यक्तिगत विकास के साथ विश्वविद्यालय के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी। महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास, रचनात्मकता, सामाजिक सरोकार और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना क्लब की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम की विशेष अतिथि काठाडीह ग्राम की सरपंच श्रीमती त्रिवेणी साहू ने महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं की भूमिका और सामाजिक जागरूकता पर प्रकाश डालते हुए ग्राम काठाडीह में चलाए जा रहे नशा-मुक्ति अभियान की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव को नशामुक्त बनाने के लिए सामुदायिक सहभागिता के साथ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति की पत्नी श्रीमती लिली दयाल की विशेष उपस्थिति रही। उन्हें कार्यक्रम में प्रथम महिला के रूप में विशेष सम्मान एवं आत्मीय सहभागिता के साथ शामिल किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्ष एवं एस.एस. वूमेन क्लब की अध्यक्ष डॉ. नीति ताम्रकार ने क्लब की प्रस्तावना एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्लब विश्वविद्यालय की सभी महिला शिक्षकों एवं कर्मचारियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां वे अपने विचारों, अनुभवों और प्रतिभाओं को साझा करते हुए संस्थागत एवं व्यक्तिगत विकास में सहभागी बन सकेंगी।
शक्ति, संवेदना और स्वाभिमान का प्रतीक बना क्लब का लोगो
समारोह के दौरान एस.एस. वूमेन क्लब के लोगो का विमोचन भी किया गया। क्लब की पहचान ‘शक्ति, संवेदना और स्वाभिमान’ की भावना पर आधारित रखी गई है। यह लोगो महिलाओं की सामूहिक शक्ति, संवेदनशीलता और आत्मसम्मान का प्रतीक बताया गया।
कार्यक्रम की थीम छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं लोकपरंपराओं पर केंद्रित रही। हरेली-सावन मिलन के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्रकृति, हरियाली और सामुदायिक सौहार्द को जीवंत रूप दिया गया। पारंपरिक परिवेश में आयोजित कार्यक्रम ने महिला सहभागिता के साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी अभिव्यक्त किया।
इसी अवसर पर वृक्षारोपण कर एस.एस. वूमेन क्लब की नींव रखी गई। इसे महिला सशक्तिकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति क्लब की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा गया। हरियाली और प्रकृति से जुड़ी इस पहल ने हरेली-सावन मिलन समारोह के उद्देश्य को और सार्थक बनाया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनामिका शर्मा ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों एवं कर्मचारियों सहित शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह ने महिलाओं के बीच संवाद, सहयोग और सहभागिता की नई शुरुआत करते हुए विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक एवं प्रभावी पहल का रूप लिया।
