रायकेरा/घरघोड़ा। स्वतंत्रता दिवस के उत्सवी माहौल के बीच स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय रायकेरा में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान एवं ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर पर भव्य रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति की मनमोहक तस्वीर पेश की।

राज्य शासन एवं जिला प्रशासन रायगढ़ के निर्देश तथा जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू के मार्गदर्शन में आयोजित प्रतियोगिता संस्था के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार कर्ण के नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी राम कुमार पटेल के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
तिरंगे के रंगों में दिखा देशप्रेम
प्रतियोगिता में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने आकर्षक रंगोलियों के माध्यम से तिरंगे की आन-बान-शान, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, राष्ट्रीय एकता और ‘वंदे मातरम’ की गौरवशाली यात्रा को जीवंत रूप दिया।
रंगों और कलात्मक संयोजन से सजी रंगोलियां विद्यालय परिसर में आकर्षण का केंद्र रहीं। निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, विषय-वस्तु, रंग संयोजन और देशभक्ति के संदेश के आधार पर उत्कृष्ट रंगोलियों का चयन किया।
युवाओं में राष्ट्रभावना जगाने का संदेश
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्राचार्य शैलेंद्र कुमार कर्ण ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी राम कुमार पटेल ने कहा कि राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगीत हमारे राष्ट्रीय गौरव एवं एकता के प्रतीक हैं। ऐसी रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों में देशभक्ति, सामाजिक समरसता, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करती हैं।
प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों, रासेयो स्वयंसेवकों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।
रायकेरा में आयोजित यह आयोजन सिर्फ रंगोली प्रतियोगिता नहीं, बल्कि रंगों के जरिए नई पीढ़ी के मन में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत करने का जीवंत प्रयास रहा।
