धरमजयगढ़, 18 जुलाई। कभी-कभी कुछ लोग अदालत, पंचायत और कानून की लंबी प्रक्रिया से इतना अधीर हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि टांगी ही सबसे बड़ी न्यायाधीश है।
धरमजयगढ़ के ग्राम क्रोंधा देवमारीडांड में भी दो भाइयों ने वर्षों पुराने भूमि विवाद का ऐसा “समाधान” निकाला, जिसने दो जिंदगियां छीन लीं और पूरे इलाके को दहला दिया।
मामला सिर्फ जमीन का नहीं था, बल्कि उस सोच का भी था, जिसमें कुछ लोग यह मान बैठते हैं कि अगर सबूत जला दिए जाएं, तो सच भी राख हो जाएगा। लेकिन शायद आरोपियों को यह अंदाजा नहीं था कि आज की पुलिस सिर्फ बयान और गवाहों के भरोसे नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच, एफएसएल और पुलिस डॉग की सूंघने की क्षमता पर भी काम करती है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में धरमजयगढ़ पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर इस ब्लाइंड डबल मर्डर की गुत्थी सुलझा दी। जांच में सामने आया कि ग्राम क्रोंधा निवासी मंगल राठिया और उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया की हत्या किसी दुर्घटना का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों से सुलग रही रंजिश का खौफनाक अंत थी।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2013 में खरीदी गई जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चला आ रहा था। समझौते के बाद भी मन की आग शांत नहीं हुई और आखिरकार 14 जुलाई की रात दो सगे भाइयों ने टांगी उठाकर अपने “न्याय” की पटकथा लिख डाली। पहले दंपति की बेरहमी से हत्या की गई और फिर शवों तथा घर में आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
शायद आरोपियों को लगा होगा कि आग सब कुछ निगल जाएगी, लेकिन वे यह भूल गए कि अपराध के निशान सिर्फ दीवारों पर नहीं, बल्कि परिस्थितियों, तकनीक और जांच एजेंसियों की नजर में भी दर्ज होते हैं। घटनास्थल से मिली टांगी की गंध ने पुलिस डॉग रूबी को सीधे आरोपियों तक पहुंचा दिया। एफएसएल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक पूछताछ ने पूरी साजिश की परतें खोल दीं।
धरमजयगढ़ पुलिस ने आरोपी श्याम लाल राठिया (32 वर्ष) और जीवन लाल राठिया (48 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त टांगी और घटना के समय पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जमीन के टुकड़े के लिए इंसानियत कितनी सस्ती हो गई है। जिस विवाद को कानून और बातचीत से सुलझाया जा सकता था, उसे हिंसा की आग में झोंक दिया गया। नतीजा यह हुआ कि एक परिवार ने अपने प्रियजनों को खो दिया और दूसरा परिवार सलाखों के पीछे पहुंच गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि आपसी रंजिश या भूमि विवाद का समाधान कानून के दायरे में ही होना चाहिए। क्षणिक आवेश में लिया गया हिंसक फैसला न केवल निर्दोषों की जान लेता है, बल्कि आरोपी और उसके पूरे परिवार का भविष्य भी बर्बाद कर देता है।
धरमजयगढ़ की यह घटना एक कड़वी सीख छोड़ गई है—जमीन के लिए बोया गया नफरत का बीज आखिरकार सिर्फ बर्बादी की फसल ही देता है।

