रायपुर 16 जून 2026 । छत्तीसगढ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिनांक 12 जून 2026 को दिए गए नवीन आदेश जिसमें शासकीय विद्यालयों और शासकीय अनुदान प्राप्त ग़ैर शासकीय विद्यालयों में धर्म विशेष के मंत्रोच्चार को अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया है जिसका विरोध शुरू हो गया है।
बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने कहा कि यह पूरी तरह से असंवैधानिक और भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विपरीत बताया क्योंकि भारत देश में विभिन्न पंथ और धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। यहां पर हिन्दू धर्मावलंबी हैं, तो मुस्लिम, सिख,इसाई, सतनामी,कबीरपंथी, बौद्ध, जैन,पारसी भी हैं और छत्तीसगढ में बहुसंख्यक आदिवासी समाज भी हैं जिनकी जनसंख्या 32 से 36% तक है। जिनकी विशिष्ट पूजा पद्धति और संस्कृति भी अपनी अलग पहचान रखती है।
छत्तीसगढ में संत गुरू घासीदास बाबा जी के द्वारा चलाए गए सतनाम पंथ के अनुयायी भी लगभग 16% की आबादी रखते हैं। वही बस्तर सहित छत्तीसगढ के कई क्षेत्रों में बंगाल के संत हरिचांद, व गुरुचांद ठाकुर के द्वारा स्थापित किए गए मतुआ धर्म को मानने वाले भी अच्छी खासी जनसंख्या रखते हैं।
इन्होंने कहा कि इतनी विशाल आबादी रखने वाले विभिन्न धर्मावलंबियों की धार्मिक आस्थाओं को दरकिनार करके बीजेपी सरकार अपने मातृसंगठन आर.एस.एस की कट्टरपंथी विचारधारा को छत्तीसगढ जैसे धर्मनिरपेक्ष राज्य में जबरन थोपने का काम कर रही है, जो कि बिल्कुल भी उचित नहीं है। आर.एस.एस की कठपुतली बनकर काम कर रहे हमारे आदिवासी समाज के सीएम को बिल्कुल भी इस बात का एहसास नहीं है कि उनकी खुद की आदिवासी सभ्यता,संस्कृति,पूजा-पाठ का तौर-तरीका सभी से अलग हटकर है। एक आदिवासी सीएम को जब राज्य का मुखिया बनने का मौका प्राप्त हुआ है,तो उनको अपनी आदिवासी कल्चर को राज्य में स्थापित करने का काम करना चाहिए था। परंतु बहुत दुख की बात है कि हमारा आदिवासी सीएम दूसरों के इशारे पर चलकर अपने ही कल्चर को खत्म करके दूसरे आदिवासी विरोधी विचारधारा को राज्य के नौनिहालों के दिमाग़ में भरने का काम कर रहे हैं।
पोयाम ने कहा कि हम आदिवासी समाज की ओर से कहना चाहते हैं कि केवल आर.एस.एस की शाखा में जाने वाला ही राष्ट्रभक्त नहीं होता है। हम आदिवासियों नें उस समय से अपने जल’-जंगल और जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ी है, जिस समय आर.एस.एस का जन्म भी नहीं हुआ था।इसलिए बहुजन समाज पार्टी सरकार के इस आदेश की निन्दा करती है और ये पुरजोर मांग करती है कि तत्काल इस ग़ैर संवैधानिक आदेश को तत्काल निरस्त करने का काम करे।

