््घरघोड़ा:
कभी खुद को ताकतवर समझकर एक 13 साल की मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला आरोपी सिकंदर भारती अब कानून की असली ताकत का स्वाद चख रहा है। जिला एवं सत्र न्यायालय घरघोड़ा के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्री सहाबुद्दीन कुरैशी ने ऐसे ‘शौर्य’ पर करारा तमाचा जड़ते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुना दी है—यानि अब बाकी की जिंदगी सलाखों के पीछे ही कटेगी।
बताया जा रहा है कि आरोपी, जो खुद को शायद बहुत चालाक समझता था, वर्ष 2024 में दोपहर के समय मासूम को जबरन लेबर कॉलोनी ले गया और दरिंदगी की हद पार कर दी। लेकिन साहब, ये कोई फिल्मी कहानी नहीं थी जहां अपराध करके आराम से घूमते रहें—यहां पुलिस थी, कानून था और सबसे बड़ी बात, न्यायालय था।
पीड़िता के परिजनों ने हिम्मत दिखाई, मामला थाना पूंजीपथरा पहुंचा और फिर शुरू हुआ कानूनी शिकंजा। धारा 376 और 506 भादवि के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ। अदालत में गवाहों ने बयान दिए, दोनों पक्षों की बहस हुई और अंत में न्याय ने अपना काम किया—बिना किसी “फिल्मी ट्विस्ट” के, सीधे सजा।
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती अर्चना मिश्रा की पैरवी और न्यायालय की सख्ती ने साफ कर दिया कि “ऐसे कारनामों” के लिए अब समाज में कोई जगह नहीं बची है।
अब सवाल उन लोगों से है जो ऐसे अपराध करने से पहले खुद को बहुत ‘शातिर’ समझते हैं—
👉 क्या सोचा था? बच जाओगे?
👉 या फिर कानून सिर्फ किताबों में लिखा है?
संदेश साफ है:
जो मासूमियत पर वार करेगा, वो अब जिंदगी भर सलाखों के पीछे ही “अपनी बहादुरी” के किस्से सुनाएगा।
👉 न्यायालय की इस सख्त कार्रवाई से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि न्याय देर से सही, लेकिन आता जरूर है—और जब आता है, तो पूरी ताकत के साथ आता है।
