रायगढ़, 2 अप्रैल 2026।
जिला प्रशासन द्वारा लैलूंगा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर आमजनों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया। शिविर में पहुंचे ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया, वहीं पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ भी मिला। एक ही स्थान पर कई विभागों की सेवाएं मिलने से लोगों में संतोष और प्रशासन के प्रति भरोसा साफ नजर आया।

शिविर में “यूरिया-डीएपी छोड़बो, हरी खाद बोवाई करबो” अभियान के तहत हरी खाद की प्रदर्शनी और केलो जैविक ‘जवा फूल’ का प्रदर्शन खास आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों और ग्रामीणों ने जैविक खेती की ओर बढ़ने में गहरी रुचि दिखाई।

एक जगह मिली हर सुविधा, उमड़ी भीड़
विभागीय स्टॉलों में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। यहां पीएम आवास, राशन कार्ड, राजस्व, स्वास्थ्य, बिजली, महिला एवं बाल विकास, आयुष्मान कार्ड, आधार पंजीयन, लर्निंग लाइसेंस सहित अनेक सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई गईं।

हितग्राहियों को मिला सीधा लाभ
शिविर में विभिन्न योजनाओं के तहत सैकड़ों लोगों को लाभान्वित किया गया—
6 हितग्राहियों को वृद्धा एवं विधवा पेंशन
13 परिवारों को राशन कार्ड
5 किसानों को केसीसी चेक
9 दिव्यांग छात्रों को शैक्षणिक सामग्री
14 लोगों को फलदार पौधे
3 हितग्राहियों को मत्स्य उपकरण

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15 लोगों को घर की चाबी, 14 को स्वीकृति पत्र
हितग्राहियों ने मौके पर लाभ मिलने पर खुशी जताते हुए शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
राजस्व प्रकरणों का भी हुआ समाधान
राजस्व विभाग ने नामांतरण, बंटवारा जैसे लंबित मामलों का मौके पर निराकरण किया। साथ ही महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी और नोनी सुरक्षा योजना की जानकारी भी दी गई।
जनप्रतिनिधियों ने सराहा प्रयास
जनप्रतिनिधियों ने शिविर को आमजन के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि अब लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से गांव स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
अगले शिविर की तिथि तय
जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे ने शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को बेहतर सेवाएं देने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि
👉 04 अप्रैल को घरघोड़ा
👉 09 अप्रैल को खरसिया
में अगला जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया जाएगा।
👉 निष्कर्ष:
लैलूंगा का यह शिविर प्रशासन की सक्रियता और जवाबदेही का मजबूत उदाहरण बना, जहां “समस्या से समाधान तक” की प्रक्रिया सच में जमीन पर उतरती दिखी।
