पंडरिया। पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा सत्र के अंतिम दिन कबीरधाम जिला व प्रदेश से जुड़े प्रमुख विषयों से जुड़े प्रश्न किए। इस दौरान उन्होंने कृषि विकास व किसानों के कल्याण, आदिवासी आश्रम एवं छात्रवास में रिक्त पदों की आपूर्ति तथा मतस्य पालन को बढ़ावा देने सरकार की योजनाओं और प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण का मुद्दा उठाया।
पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी के विषय में प्रश्न किया कि पंडरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल कितना कृषि रकबा है? वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 तथा 2025-26 में उर्वरक (खाद) एवं प्रमाणित बीज की मांग, उनके भंडारण तथा किसानों को किए गए वितरण की वास्तविक स्थिति की वर्षवार जानकारी देवें? जिसके लिखित उत्तर में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम जी ने बताया कि कृषि रकबे की जानकारी का संधारण विकासखण्डवार किया जाता है। कार्यालय भू-अभिलेख, जिला-कबीरधाम से प्राप्त जानकारी अनुसार पंडरिया विधान सभा क्षेत्र से सम्बद्ध विकासखंड कवर्धा, पंडरिया एवं सहसपुर लोहारा अंतर्गत कुल कृषि रकबा 1,46,124 हेक्टेयर है। जिसमें कवर्धा अंतर्गत 43727, पंडरिया में 54315तथा सहसपुर लोहारा में कुल कृषि रकबा 48082 है। वित्तीय वर्ष 2023-24 खरीफ मौसम में 49430 क्विंटल लक्ष्य के तहत 58226 क्विंटल भण्डारण किया गया और 53308 क्विंटल वितरण किया गया वहीं रबी मौसम में में 9466 क्विंटल लक्ष्य के तहत 18169 क्विंटल भण्डारण किया गया और 8309 क्विंटल वितरण किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 खरीफ मौसम में 52230 क्विंटल लक्ष्य के तहत 60289 क्विंटल भण्डारण किया गया और 55523 क्विंटल वितरण किया गया वहीं रबी मौसम में में 12270 क्विंटल लक्ष्य के तहत 20964 क्विंटल भण्डारण किया गया और 13299 क्विंटल वितरण किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 खरीफ मौसम में 53890 क्विंटल लक्ष्य के तहत 65115 क्विंटल भण्डारण किया गया और 59780क्विंटल वितरण किया गया वहीं रबी मौसम में में 14850 क्विंटल लक्ष्य के तहत 13161 क्विंटल भण्डारण किया गया और 7687 क्विंटल रासायनिक ऊर्वरक वितरण किया गया।
उन्होंने कबीरधाम जिले के आदिवासी आश्रम, शालाओं एवं छात्रावासों में रिक्त पदों की भर्ती के विषय में प्रश्न किया कि कबीरधाम जिले में आदिम जाति विकास मंत्रालय अंतर्गत संचालित आश्रम, शालाओं एवं छात्रावासों में शिक्षकों व अधीक्षकों के कितने पद रिक्त हैं? जिले में आदिवासी विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति एवं अन्य प्रोत्साहन राशि पिछले दो वर्षों से विलंब से क्यों मिल रही है? इस विलंब के लिए कौन जिम्मेदार हैं तथा भविष्य में समय पर नियमित भुगतान सुनिश्चित करने हेतु क्या व्यवस्था की गई है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री जी ने बताया कि विभाग अंतर्गत कबीरधाम जिले में संचालित आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में अधीक्षक के 44 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों की पूर्ति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। विलंब की स्थिति निर्मित नहीं हुई है, केवल 02 विद्यार्थियों का आधार सीडिंग एवं खाता बंद होने के कारण भुगतान असफल रहा है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत अध्ययनरत् विद्यार्थियों को वर्तमान सत्र से नवीन व्यवस्था के तहत् भुगतान समय पर सुनिश्चित करने हेतु समय-सीमा का निर्धारण किया जाकर कार्यवाही की जा रही है।
भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि कबीरधाम जिले में नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर कुल कितने मत्स्य पालक पंजीकृत है? NFDP के माध्यम से अब तक कबीरधाम जिले के कुल कितने लाभार्थियों को कुल कितनी आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है ? कबीरधाम जिले में कुल कितने मछली पालन केन्द्र पंजीकृत हैं तथा इनमें से वर्तमान में कितने केंद्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं? वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में कबीरधाम जिले में मत्स्य बीज, चारा एवं उपकरण वितरण के लिए कुल कितना बजट स्वीकृत किया गया और उसमें से कितना व्यय किया गया? जिसके लिखित उत्तर में आदिम जाति विकास मंत्री जी ने बताया कि कबीरधाम जिले में नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर कुल 1448 मत्स्य पालक पंजीकृत है। एनएफडीपी के माध्यम से अब तक कबीरधाम जिले के कुल 1250 लाभार्थियों को राशि रू. 49.72 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। कबीरधाम जिले में पंजीकृत व सक्रिय रूप से कुल 05 मछली पालन केन्द्र कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कबीरधाम जिला अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 52.02 लाख की राशी स्वीकृत की गई और उतनी ही राशी व्यव की गई जिससे 1251 हितग्राही लाभान्वित हुए वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कबीरधाम जिले में मत्स्य बीज, चारा एवं उपकरण वितरण के लिए 60.59 लाख रु स्वीकृत किया गया और उतनी ही राशी व्यय की गई जिससे 1250 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
भावना बोहरा ने राज्य में ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के सन्दर्भ में प्रश्न किया कि राज्य में वर्तमान में संरक्षित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों की कुल संख्या कितनी है? उक्त स्थलों में से कितने स्थल जीर्ण-शीर्ण अथवा क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं? ऐसे स्थलों के संरक्षण, मरम्मत एवं पुनरुद्धार हेतु विभाग द्वारा कौन-कौन सी कार्ययोजना/परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं? वर्ष 2024-25 एवं वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण हेतु कितनी राशि आवंटित एवं व्यय की गई है? जिसके लिखित उत्तर में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी ने बताया कि राज्य में वर्तमान में संरक्षित ऐतिहासिक एवं पुरातत्वीय स्थलों की कुल संख्या 109 है। केंद्र द्वारा संरक्षित 46 एवं राज्य संरक्षित स्थलों की संख्या 63 है। उक्त स्थलों के संरक्षित स्मारक घोषित होने के उपरांत यथास्थिति में हैं। केन्द्र एवं राज्य संरक्षित स्मारकों/ स्थलों का नियमित निरीक्षण एवं संरक्षण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार सतत रूप से किया जा रहा है। वर्तमान में सभी स्मारक/स्थल संरचनात्मक दृष्टि से सुरक्षित हैं तथा जीर्ण-शीर्ण अथवा क्षतिग्रस्त अवस्था में नहीं हैं। राज्य संरक्षित स्मारकों/ स्थलों के संरक्षण, मरम्मत एवं पुनरूद्धार हेतु विभाग के अनुरक्षण, रसायनिक संरक्षण एवं लघु निर्माण मद में प्राप्त नियमित बजट से किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रायपुर मंडल, रायपुर के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत केन्द्रीय संरक्षित स्मारकों एवं स्थलों पर संरक्षण तथा अनुरक्षण कार्य समय-समय पर आवश्यकता अनुसार एवं निदेशालय द्वारा आबंटित निधि एवं अनुमोदित वार्षिक संरक्षण कार्यक्रमों के अनुरूप संपादित किया जाता है। वर्ष 2024-25 में केंद्र संरक्षित स्थलों हेतु 5 करोड़ रु की राशी का आबंटन किया गया जिसमें 2 करोड़ 5 लाख 62 हजार से अधिक खर्च हुआ बाकि रकम पर्यटकों की सुविधा एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान व उद्यान के रखरखाव में खर्च किया गया वहीं 18 राज्य संरक्षित स्मारकों हेतु 80 लाख रु की राशी का आबंटन किया गया जिसमें 70 लाख 83 हजार रु व्यय हुआ बाकि राशी स्मारकों के जीर्णोद्धार, मरम्मत में खर्च की गई। उसी प्रकार वर्ष 2025-26 में केंद्र संरक्षित स्थलों हेतु 5 करोड़ 90 लाख रु की राशी का आबंटन किया गया जिसमें 1 करोड़ 35 लाख 31 हजार से अधिक खर्च हुआ बाकि रकम पर्यटकों की सुविधा एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान व उद्यान के रखरखाव में खर्च किया गया वहीं 25 में से 13 राज्य संरक्षित स्मारकों हेतु 1 करोड़ 85 लाख रु की राशी का आबंटन किया गया जिसमें 85 लाख 58 हजार रु व्यय हुआ बाकि राशी स्मारकों के जीर्णोद्धार, मरम्मत में खर्च की गई।
