उल्लास मेले में नव साक्षरों ने दिखाई प्रतिभागांव-गांव में जगी शिक्षा की अलख

जगदलपुर, 27 जनवरी 2026


बस्तर जिले में इस वर्ष का गणतंत्र दिवस पारंपरिक समारोहों से हटकर साक्षरता के एक नए उत्सव का साक्षी बना। सोमवार को जिले भर में आयोजित उल्लास मेले ने राष्ट्रीय पर्व को एक नया आयाम दिया, जहाँ गणतंत्र का जश्न केवल ध्वजारोहण तक सीमित न रहकर ज्ञान और स्वावलंबन के प्रदर्शन का माध्यम बन गया।
जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को धरातल पर उतारने के लिए की गई इस अनूठी पहल के तहत जिले के प्रत्येक गांव में उल्लास मेलों का आयोजन किया गया। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत सजे इन मेलों में एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला।
जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों में नव साक्षरों ने पूरे उत्साह के साथ स्टॉल लगाए और वहां अपनी सीखी हुई सरल भाषाई तथा गणितीय अवधारणाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। जिन वयस्कों ने जीवन का लंबा समय निरक्षरता में गुजारा था, उन्हें आज आत्मविश्वास के साथ पढ़ते-लिखते और गणितीय कौशल का प्रदर्शन करते देख न केवल प्रशासन, बल्कि पूरा ग्रामीण समाज गर्व से भर उठा।
इस सम्पूर्ण अभियान का मूल उद्देश्य भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाना है। इस मिशन के केंद्र में 15 वर्ष से अधिक आयु के वे वयस्क हैं जो स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए थे। प्रशासन का लक्ष्य इन नागरिकों को महज बुनियादी साक्षरता और अंकों का ज्ञान देना भर नहीं है, बल्कि उन्हें महत्वपूर्ण जीवन कौशल सिखाकर समाज में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं कलेक्टर द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर व्यापक असर दिखाई दिया। इसके लिए मैदानी अमले की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसमें ग्राम पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और कोटवारों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
इन सभी ने शिक्षा विभाग के साथ बेहतर समन्वय बनाकर गांवों में सघन सर्वे और प्रचार-प्रसार किया, जिससे कोई भी पात्र व्यक्ति इस साक्षरता उत्सव के लाभ से वंचित न रहे। बस्तर में गणतंत्र दिवस पर उल्लास मेले के इस सफल आयोजन से शिक्षा की अलख और बदलाव की बयार सुदूर गांवों तक पहुंची।

