बसंत रात्रे।
आज, 15 अक्टूबर को हम भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और राष्ट्रपुरुष डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का जन्मदिवस मनाते हैं। यह दिन केवल एक व्यक्ति के जन्म का नहीं, बल्कि उस विचारधारा के उत्सव का प्रतीक है जिसने करोड़ों भारतीयों को बड़ा सपना देखने और उसे साकार करने की प्रेरणा दी।
डॉ. कलाम का जीवन अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे कलाम जी ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। कड़ी मेहनत, ईमानदारी और समर्पण के बल पर उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। भारत के मिसाइल मैन के रूप में उन्होंने ‘अग्नि’ और ‘प्रथ्वी’ जैसी मिसाइल परियोजनाओं को सफलता दिलाई।
राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे जनता के सच्चे सेवक बने रहे। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने का मंच बना दिया। उनका सादा जीवन और सरल स्वभाव उन्हें हर वर्ग के लोगों के दिलों में बसाता है। विशेषकर युवाओं के लिए वे सच्चे मार्गदर्शक रहे — “सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते,” उनका यह कथन आज भी हर युवा के हृदय में ऊर्जा भर देता है।
डॉ. कलाम का मानना था कि भारत तभी सशक्त बनेगा जब उसके युवा शिक्षा, विज्ञान और नैतिकता को अपने जीवन का आधार बनाएँगे। उन्होंने “विकसित भारत 2020” का सपना देखा था, जो आज भी देश की नीति और सोच को दिशा दे रहा है।
आज उनके जन्मदिवस पर उन्हें नमन करते हुए हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम अपने देश को ज्ञान, विज्ञान और मानवीय मूल्यों से समृद्ध बनाएँ।
🙏 डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन।
